प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने कहा कि भारत प्राचीनकाल से ही विज्ञान के क्षेत्र में विश्व को कुछ न कुछ देता आया है। इससे न केवल समाज का सर्वांगीण विकास होगा बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी बहुत कुछ सुनने और समझने को मिलेगा। वे विश्वविद्यालय में आयोजित भौतिक विज्ञान के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के शुभारंभ पर बोल रहे थे। सम्मेलन में 250 वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से विश्वविद्यालय के फिजिक्स विभाग की गरिमा और शैक्षणिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों को मुख्य रूप में तीन विधाओं पर अधिक प्रयास करना चाहिए। इसमें ज्ञान कोष संरक्षित करना, ज्ञानकोष में नए शोध, नवाचार और विकास की नई तकनीकें खोज कर, संपूर्ण ज्ञानकोष तैयार करने पर काम होना चाहिए। वैज्ञानिक शोध में भारत विश्व गुरु रहा है।
लेकिन इसके प्रचार प्रसार में हम पिछड़ते जा रहे हैं। हमारे पूर्वजों और ऋषि मुनियों ने जो वैज्ञानिक खोजें और आविष्कार किए हैं उन्हें समाज तथा मानव कल्याण में इस्तेमाल करने की जरूरत है। सम्मेलन में एचपीयू के भौतिकी विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. रमन शर्मा ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत और अभिनंदन किया।
इस मौके पर प्रति कुलपति प्रो. राजेंद्र सिंह चौहान, अधिष्ठाता अध्ययन प्रो. टीसी भल्ला, कुलसचिव प्रो. मोहन झारटा सहित विभाग के निदेशक और अधिष्ठाता मौजूद रहे। उद्घाटन समारोह का संचालन प्रो. वीर सिंह रांगड़ा ने किया।
सौर ऊर्जा का सौ फीसदी करें प्रयोग
शिमला। जर्मनी के विख्यात वैज्ञानिक प्रो. क्रिस्टोफ लिनेऊ ने संघनित पदार्थ भौतिकी पर मूल बीज भाषण दिया। सम्मेलन में 25 मुख्य भाषणों के अलावा 150 से अधिक पेपर प्रस्तुत होंगे। जर्मनी के ओल्डनवर्ग कार्लवर्न ओस्टिची विश्वविद्यालय के भौतिकी वैज्ञानिक प्रो. क्रिस्टोफ लिनेउ ने कहा कि आज ऊर्जा प्राप्त करना बड़ी चुनौती है। उपलब्ध सौर ऊर्जा का सौ फीसदी इस्तेमाल कर इसे मानव विकास में लगाया जा सकता है। आज इस तरह के वैज्ञानिक संयंत्र भौतिक विज्ञान की मदद से तैयार करने होंगे जिससे अधिक से अधिक सौ ऊर्जा का इस्तेमाल हो सके।
विदेशों से आए हैं वैज्ञानिक
विश्वविद्यालय में भौतिकी विभाग ने ‘संघनित पदार्थ भौतिकी’ पर शुरू हुए तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में जर्मनी, फ्रांस, अमेरिका, इटली, इंग्लैंड, जापान और कोरिया समेत विदेशी भौतिकी वैज्ञानिक हिस्सा लेने पहुंचे हैं। विवि अनुदान आयोग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, डीआरडीओ जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।
सौ ऊर्जा को एनर्जी के रूप में करें इस्तेमाल
शिमला। होटल पीटर हॉफ में भौतिक विज्ञान के कंडेस्ड मेटर फिजिक्स पर शुरू हुए सम्मेलन में वैज्ञानिकों ने सौर ऊर्जा को एनर्जी के विकल्प के रूप में विकसित करने की वकालत की। साथ ही इसके दोहन करने की तकनीकें भी विकसित करनी होंगी।
जर्मनी से आए वैज्ञानिक प्रो. क्रिसटोफ लेन्यू ने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों में सौर ऊर्जा को एनर्जी के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यहां बारह महीने सौर ऊर्जा उपलब्ध है। इसे रोजमर्रा के कार्यों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए जरूरत है कि मालीक्यूलर और नेनो स्ट्रक्चरल विकसित उपकरण बनाने की। इससे सौर ऊर्जा को बिजली में बदला जा सकता है।
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के कुलपति प्रो. अरुण ग्रोवर ने चुंबकीय क्षमताओं को बढ़ाने पर शोध पढ़ा। कहा कि इसमें शोध कर इसे आम लोगों के लिए और उपयोगी बनाए जाने की जरूरत है। चुंबकीय क्षमताओं को बढ़ाकर इसे मनुष्य के लिये उपयोगी बनाया जा सकता है। यूजीसी के सीएटी इंदौर के निदेशक प्रवीण चड्ढा ने फिजिक्स और कंडेंस्सड फिजिक्स की थियोरी पर शोध पढ़ा।
लाइनों में बर्बाद होती है बिजली
कैमरेज यूके से आए वैज्ञानिक सिद्धार्थ सक्सेना ने सुपर कंडक्टीविटी पर शोध पत्र पढ़ा। उन्होंने बताया कि बिजली लाइन में बर्बाद हो जाती है। सुपर कंडक्टिवीटी से इस नुकसान को बचाया जाना संभव है।
पानी से तैयार लेजर तकनीक
आईआईटी मुंबई की परिंदा ने पानी से लेजर पैदा करने पर शोध पढ़ा और बताया कि इसके इस्तेमाल से लेजर से उपचार की तकनीक का इस्तेमाल सस्ता हो सकता है। विवि के फिजिक्स विभागाध्यक्ष डा. रमन शर्मा और प्रो. महावीर सिंह ने बताया कि इस सम्मेलन में एचपीयू के शोधकर्ता भी अपने शोध पढ़ेंगे।