नोएडा में एक ओर शिक्षा का अधिकार कानून के तहत स्कूली बच्चों को सारी सुविधाएं मुहैया कराने पर जोर दिया जा रहा है।
वहीं, दूसरी ओर राज्य सरकार प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूलों में पढ़ाई कर रहे बच्चों की वार्षिक परीक्षाओं के लिए कागज का एक पन्ना तक मुहैया नहीं करा पा रही है।
आलम यह है कि परीक्षा देने के लिए बच्चे घर से कॉपियां ला रहे हैं। यही नहीं प्रश्न पत्र बनाने के लिए शिक्षक अपनी जेब से पैसे लगा रहे हैं।
वहीं इसके लिए किसी तरह के सरकारी फंड का प्रावधान नहीं होने की बात अधिकारी कर रहे हैं। जिले में सोमवार से प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूलों में वार्षिक परीक्षा शुरू हुई हैं, लेकिन इसके लिए बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से किसी तरह की व्यवस्था नहीं की गई है।
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परीक्षा देने के लिए बच्चों को घर से रजिस्टर लाने की सलाह दी गई। इसी रजिस्टर पर बच्चे सभी पेपरों के उत्तर लिखेंगे।
यही नहीं शिक्षकों का कहना है कि उन्हें अपनी जेब से पैसे लगाकर पेपर प्रिंट कराने हैं ताकि परीक्षा ली जा सकें। बच्चों के लिए ब्लैक बोर्ड पर प्रश्न लिखे जाएंगे और उसे देखकर बच्चे अपने रजिस्टर में उत्तर लिखेंगे।
परीक्षा देने के बाद बच्चों का रजिस्टर स्कूल में ही जमा कराया जाएगा। यही प्रक्रिया बाकी दिन भी चलेगी।
इस बारे में जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ, गौतमबुद्ध नगर के अध्यक्ष जोध सिंह भाटी ने बताया कि विभाग की ओर से पेपर के लिए कोई फंड नहीं दिया जाता है। शिक्षक पेपर सेट करने के बाद अपनी जेब से पैसे देकर प्रिंट कराते हैं।