शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के सकारात्मक रुझान और एग्जिट पोल के मद्देनजर सोमवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने डॉलर की खरीद में तेजी दिखाई।
हालांकि, सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 21 पैसा मजबूत होकर 10 महीने के उच्चतम स्तर 59.51 तक पहुंच गया, लेकिन बाद में ,एक पैसे की गिरावट के साथ 60.05 के स्तर पर बंद हुआ।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों का कहना है कि चुनाव नतीजों से पहले रुपये में उतार-चढ़ाव को थामने के लिए रिजर्व बैंक सरकारी बैंकों के जरिए डॉलर की खरीद करवा रहा है। हालांकि, रुपये में मजबूती अर्थव्यवस्था के लिहाज से अच्छा संकेत है, लेकिन इससे निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (ईईपीसी इंडिया) के अध्यक्ष अनुपम शाह का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये का 60 रुपये से ज्यादा मजबूत होता निर्यातकों केलिए अच्छी खबर नहीं है। रुपये की मजबूती के चलते ग्लोबल मार्केट में भारतीय उत्पादों के लिए जगह बनाना मुश्किल हो जाएगा।
उधर चीन अपनी मुद्रा को अपने फायदेमंद स्तर पर कायम रखे हुए है। शाह का कहना है कि यह रिजर्व बैंक के लिए डॉलर खरीदने और अपना विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने का सही समय है।
गौरतलब है कि निर्यातकों की अधिकतर कमाई डॉलर में होती है, और डॉलर के मुकाबले रुपये के मजबूत होने से निर्यातकों के मुनाफे पर चोट पहुंचती है। निर्यातकों के अलावा डॉलर में कमाई करने वाले आईटी उद्योग के भी रुपये की मजबूत शुभ संकेत नहीं है। हालांकि, रुपया मजबूत होने से देश के चालू खाते के घाटे से जरूर राहत मिलेगी।