मोदी मंत्र के मुरीद दुनिया भर में हैं, लेकिन दून के मैनेजमेंट छात्र नरेंद्र मोदी के डी-एफ-वी मंत्र के मुरीद हैं। डी-एफ-वी यानी विकास, विश्वास और विजय।
पढ़ें, आर्मी लेफ्टिनेंट ने अपनी क्लासमेट की अस्मत लूटी
विकास के नजरिए से मौजूदा संसाधनों पर विश्वास और अंतत: जीत हासिल करना। इसी मंत्र के आधार पर दून में भी मैनेजमेंट संस्थान मार्केटिंग और सेलिंग के फंडे अपने छात्रों को समझा रहे हैं।
यह मोदी की विजय की सीढ़ी
मार्केटिंग काम की और सेलिंग इस काम से बनी तस्वीर की। यानी गुजरात में किए विकास की तस्वीर मोदी ने चीन, सिंगापुर, जापान जैसे देशों में बेची। जो देश बहुत कम गुजरात के बारे में जानते थे, उन्होंने भी अपनी इकाईयों को गुजरात में स्थापित करने में रुचि दिखाई।
पढ़ें, बाबा रामदेव के खाद्य उत्पाद में हुआ बढ़ा 'बदलाव'
इसका नतीजा यह हुआ कि रोजगार बढ़ा और प्रत्यक्ष रूप से यह मोदी की विजय की सीढ़ी बना। दून के मैनेजमेंट छात्रों की रुचि अब यहां हो रही नरेंद्र मोदी की रैली में उन्हें सुनने पर है।
पढ़ें, सेना को अफसर देने में उत्तराखंड टॉप पर
वह देखना चाहते हैं कि क्या यहां भी मोदी वाइब्रेंट गुजरात की तस्वीर को आधर बना उत्तराखंड के सामने डेवलपमेंट का नया माडल पेश करेंगे? या नहीं? एमआईटी के छात्र पुनीत, उत्कर्ष खुद भी अपने साथियों के साथ रैली में भागीदार बनने के इच्छुक हैं।
स्पेशल स्किल्स से कामयाब मोदी
इस दौर में पेशा कोई भी हो, मार्केटिंग बेहद जरूरी है। अगर आप बहुत अच्छा काम करते हैं, लेकिन उसकी सही तरीके से मार्केटिंग नहीं कर पाते तो आप सफल नहीं हो पाएंगे। आपको उसे बेचने का तरीका आना चाहिए, जो मोदी से बेहतर कोई नहीं जानता। उन्होंने गुजरात के विकास और अपनी सोच को जनता के सामने पेश करने में कामयाबी हासिल की है।
- स्वाति बिष्ट, आईएमएस
दूसरों की कमजोरी में अवसर देखा
मोदी से सीखा जा सकता है कि किस तरह दूसरों की कमजोरी में अपने लिए अवसर बनाया जा सकता है। कुछ साल पहले झांकें। टाटा का पश्चिमी बंगाल में लगने वाला संयंत्र गुजरात में खींच लेना मोदी की रणनीति का हिस्सा रहा। पर्यटन की बात करें तो उन्होंने बाहरी लोगों को लुभाने में राजस्थान को पीछे छोड़ दिया है। इसे सफलता ही कहा जाएगा।
- एससी मित्तल, इंडस्ट्रियलिस्ट