यूजी में आठ से दस माह बाद घोषित हो रहे परीक्षा परिणाम, जून 2016 तक यूजी के पहले बैच को डिग्री देने जैसे चुनौतीपूर्ण कार्य के सामने होने के बावजूद एचपीयू एक बार फिर से बड़ा जोखिम मोल लेने जा रहा है। रूसा सीबीसीएस को पीजी कक्षाओं में लागू करने का विवि जोखिम लेने जा रहा है।
इसको लेकर बीते रोज सोशल साइंस फैकल्टी की एक बैठक भी हो चुकी है। जिस तरह से शिक्षकों की भर्ती के एक के बाद एक विभाग के मामलों पर आपत्तियां दर्ज हो रही है। उससे यह संभव नहीं लग रहा है कि जून 2016 तक विवि के विभागों को नियमित शिक्षक भी मिल पाएं।
यही नहीं विश्वविद्यालय के परीक्षा विंग में कंप्यूटराइजेशन नहीं हो सका है, विवि के पास रूसा सीबीसीएस सिस्टम को चलाने के लिए अपने एक्सपर्ट तक नहीं है। विंग में यूजी की कक्षाओं के लिए भी पर्याप्त स्टाफ नहीं है। अधिकारियों के रिक्त पद चल रहे है। इन सभी मौजूदा हालातों को देखते हुए, यूजी की तरह से पीजी में भी रूसा सीबीसीएस को लागू करना एक बहुत बड़ा जोखिम होगा।
समय से डिग्री देना है सबसे बड़ी चुनौती- 2013 में अंडर ग्रेजुएट कक्षाओं में लागू किए गए रूसा सीबीसीएस के अब तक दो सेमेस्टर के परिणाम लटके हुए है। दस दस माह के बाद घोषित किए गए पहले बैच के पहले दूसरे और तीसरे, दूसरे बैच के पहले समेस्टर के परिणाम ही घोषित हो पाए है।
दूसरे और चौथे सत्र के परिणाम पिछले करीब पांच माह से लटके हुए है। जो परिणाम घोषित हुए है, उनमें भी हजारों के परिणाम आधे अधूरे है। इससे शायद ही विवि 2016 तक रूसा सीबीसीएस यूजी के पहले बैच के सभी छह सेमेस्टर का परिणाम घोषित कर डिग्री दे पाए।
विवि के शिक्षक भी नहीं है सिस्टम लागू करने के पक्ष में- विवि में हुई विभागाध्यक्षों की बैठक में मौजूद शिक्षकों ने भी शिक्षकों की भारी कमी, आधारभूत सुविधाओं के अभाव और यूजी में रूसा सीबीसीएस को लागू करने में चल रही समस्याओं का हवाला देकर जल्दबाजी न करने की ही बात कही।
विवि में चल रहे करीब 40 पीजी डिग्री डिप्लोमा कोर्स- एचपीयू में वर्तमान में करीब 32 विभागों में 40 के करीब पीजी डिग्री डिप्लोमा कोर्स हैं। इनमें अब तक सेमेस्टर सिस्टम जरूर है, मगर सीबीसीएस लागू नहीं किया गया है।
पिछले सत्र में इसे लागू करने की तैयारी थी, मगर शिक्षकों ने यह कहकर विरोध किया था, कि यूजी के पहले सीबीसीएस बैच के विवि पहुंचने पर ही इसे लागू किया जाए। इस एक साल में विवि ने रूसा लागू करने को जमीनी स्तर पर कोई विशेष तैयारी नहीं की।