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अब फीस में धोखा नहीं देंगे प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज!

Sun, 29 Jun 2014 07:06 PM IST
शैलेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
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निजी इंजीनियरिंग कॉलेज अब धोखा देकर फीसों का निर्धारण नहीं करा पाएंगे। इन कॉलेजों में सीटें यदि लगातार तीन साल तक आधे से अधिक खाली रहती हैं, तो उनकी फीस कम हो जाएगी।
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फीस निर्धारण समिति इसके आधार पर ही निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों की फीस तय करने पर मंथन कर रही है।

समिति का मानना है कि सीटें खाली रहने से प्रबंधन का खर्च भी कम होगा। इसलिए प्रति छात्र जितना खर्च हो उतनी ही फीस तय की जाए।

इस साल फीस निर्धारण के लिए करीब 200 कॉलेजों ने खर्च का ब्यौरा दिया है।
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सूबे हैं 850 तकनीकी कॉलेज

प्रदेश में मौजूदा समय करीब 850 निजी तकनीकी कॉलेज हैं। इनमें बीटेक, एमबीए, एमसीए, बीफार्मा, होटल मैनेजमेंट, बीआर्क, बीएफएडी, बीएफए तथा एमएएम की करीब 2,03,793 सीटें हैं।

इन कॉलेजों में फीस तय करने के लिए प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा की अध्यक्षता में फीस निर्धारण समिति बनी है। समिति प्रत्येक तीन वर्ष पर कॉलेजों की फीस निर्धारित करती है।

समिति ने बीते वर्ष 254 कॉलेजों की फीस तय की थी। इस साल करीब 200 निजी कॉलेजों के फीस निर्धारण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

फीस निर्धारण समिति का मानना है कि कॉलेजों की सीटें खाली रहने की स्थिति में उनका खर्च कम होना स्वाभाविक है। इस स्थिति में इन कॉलेजों की फीस कम की जा सकती है।
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जानिए, किस कोर्स में कितनी सीटें

बीटेक 1,41,153, बीफॉर्मा 8,280, बीएचएमसीटी 1,110, बीआर्क 1,840, बीएफएडी 180, बीएफए 60, एमबीए 41,730, एमसीए 8,360, एमएएम 1,080 सीटें हैं। इसमें से करीब 70 से 80 हजार सीटें हर साल खाली रह जाती हैं।

महत्वपूर्ण बात यह भी है कि प्रदेश में निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में अधिक फीस वसूली की शिकायत के लिए अपीलीय प्राधिकरण का गठन किया गया है। इसका अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति होता है।

प्राविधिक शिक्षा विभाग ने पूर्व में अपीलीय प्राधिकरण का तो गठन कर दिया था, लेकिन नियमावली नहीं बनाई गई थी। अब नियमावली बनाते हुए दंड का प्रावधान किया जा रहा है।
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