डीएवी में एलएलबी प्रवेश परीक्षा का पेपर वाट्स एप पर आउट होने के सारे सबूत सामने आने के बावजूद कॉलेज प्रशासन मामले पर पर्दा डालने की कोशिश में है।
छात्रनेताओं ने इस मसले पर कॉलेज प्राचार्य का घेराव कर कार्रवाई की मांग की तो प्राचार्य ने पहले उनसे लिखित में शिकायत देने को कह दिया। देर शाम तक छात्रों की ओर से लिखित शिकायत नहीं की गई थी।
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डीएवी कॉलेज में रविवार को सुबह 10:30 बजे शुरू हुई लॉ प्रवेश परीक्षा का पेपर 11:02 बजे ‘वाट्स एप’ के जरिये लीक हो गया था।
अमर उजाला ने पूरे सबूतों के साथ पेपर की तस्वीरें भी सोमवार के अंक में प्रकाशित कीं। इसके बाद डीएवी कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष महेश जगूड़ी, जितेंद्र कुमार रिंकू, संदीप कुमार के नेतृत्व में करीब 40 छात्र प्राचार्य का घेराव करने गए।
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उन्होंने प्राचार्य से परीक्षा निरस्त करने की मांग की। लेकिन प्राचार्य ने छात्रों से लिखित शिकायत मांग ली। उनका कहना था कि शिकायत मिले तो वह इसे डीजीपी को फॉरवर्ड करेंगे।
साइबर क्राइम एक्ट के तहत जांच में कुछ सामने आया तो कार्रवाई की जाएगी। खास बात यह है कि उन्होंने पेपर आउट के मामले में टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर कॉलेज अपने स्तर पर जांच क्यों नहीं करा रहा।
पेपर तो बाहर आया ही
कुछ लोगों का कहना है कि ‘वाटस एप’ में टाइम चेंज कर पेपर आउट दिखाया गया है, फिर भी यह तो साफ है ही कि पेपर आउट हुआ है। नियमानुसार पेपर होने के बाद कॉलेज प्रशासन छात्रों से क्वेश्चन पेपर वापस ले लेता है। ऐसे में मोबाइल पर पेपर का फोटो आना बड़ा सवाल है।
आशंका जताई जा रही है कि या तो किसी छात्र ने पहले ही पेपर बुकलेट चोरी कर ली थी या किसी छात्र ने परीक्षा के दौरान मोबाइल से तस्वीरें खींची। दोनों ही सूरत में कॉलेज प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सवालों पर भी सवाल
लॉ के प्रश्नपत्र में दिए गए सवाल भी सवालों के घेरे में आ गए हैं। कुछ छात्रों ने आरोप लगाया है कि प्रश्नपत्र में तीन सवाल गलत प्रकाशित हुए थे। इनमें एक चीफ जस्टिस का नाम गलत था, एक सवाल में गणित के विकल्प मिलान नहीं कर रहे थे और एक अन्य सवाल का जवाब हिंदी में 12, जबकि अंग्रेजी में 72 दिया गया था।
कॉलेज प्राचार्य ने ऐसी किसी भी गलती की जानकारी से इंकार किया।
हमने प्राचार्य से परीक्षा निरस्त करने की मांग की है। मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
- महेश जगूड़ी, छात्रसंघ अध्यक्ष
कॉलेज प्रशासन को डीजीपी के बजाए पहले अपने स्तर पर मामले की जांच करनी चाहिए। जब तक जांच शुरू नहीं होगी, हम दाखिले नहीं होने देंगे।
- जितेंद्र कुमार रिंकू, छात्र नेता
यह बेहद संगीन मामला है। कॉलेज प्रशासन मामले पर खामोश हो गया है। इसकी जड़ तक जांच होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
- संदीप कुमार, पूर्व अध्यक्ष, एनएसयूआई
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