प्रदेश की तीन डीम्ड यूनिवर्सिटीज पर फिर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को निर्देश दिए हैं कि वह मानकों के अनुरूप इन विश्वविद्यालयों की दोबारा जांच कर रिपोर्ट मानव संसाधन विकास मंत्रालय को दे।
मानक पूरे नहीं हुए तो इन विवि का डीम्ड दर्जा छिन जाएगा। इससे इनमें पढ़ रहे 20 हजार छात्रों के भविष्य पर तलवार लटकने लगी हैै।
2009 में मिला था दर्जा
केंद्र सरकार ने वर्ष 2009 में देश के 126 विश्वविद्यालयों को डीम्ड दर्जा दिया। वर्ष 2010 में पीएन टंडन कमेटी की सिफारिशों के आधार पर विश्वविद्यालयों को तीन श्रेणियों में बांटा।
मानकों के आधार पर 46 को ए, 36 को बी और 44 को सी श्रेणी में रखा गया। सी श्रेणी के विश्वविद्यालयों को चेतावनी दी गई कि मानकों में जल्द सुधार न किए जाने पर मान्यता खत्म कर दी जाएगी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में चला गया।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया निर्देश
अब तीन साल की कानूनी प्रक्रिया के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी को निर्देश दिए हैं कि वह ‘सी श्रेणी’ वाले विवि की मानकों के मुताबिक दोबारा जांच करे, संबंधित विवि की आपत्तियां सुनने के लिए भी कहा गया है।
अगले दो माह में यूजीसी की रिपोर्ट मिलने के बाद केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय मान्यता पर अंतिम निर्णय करेगा। सी श्रेणी वाले इन विश्वविद्यालयों में उत्तराखंड की तीन डीम्ड यूनिवर्सिटी ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी, एचआईएचटी यूनिवर्सिटी जौलीग्रांट और गुरुकुल कांगड़ी विवि हरिद्वार शामिल हैं।
यूजीसी तय करेगा छात्रों का भविष्य
तीनों विश्वविद्यालयों में करीब 20 हजार छात्र पढ़ रहे हैं। मान्यता खत्म होने की सूरत में यूजीसी तय करेगा कि इन छात्रों को किसी दूसरे विश्वविद्यालय में ट्रांसफर किया जाए या उनका कोर्स पूरा होने तक डीम्ड विवि का मौजूदा स्टेटस बरकरार रख नए सत्र से मान्यता खत्म की जाए।
हालांकि, तीनों विश्वविद्यालयों ने अपने यहां सभी संसाधन मुहैया होने और जांच से कोई दिक्कत न होने का दावा किया है।
डीम्ड का यह फायदा
यूजीसी एक्ट के मुताबिक किसी संस्थान को प्राइवेट यूनिवर्सिटी बनाने से पहले डीम्ड का दर्जा दिया जाता है। डीम्ड यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी की तरह काम करती है।
कुछ समय तक सफल संचालन के बाद यूजीसी इसे निजी विवि का दर्जा देता है। डीम्ड यूनिवर्सिटी को अपने नए कोर्स चलाने का अधिकार होता है।
क्या कहते हैं कुलपति
दिल्ली में बैठकर टंडन समिति की सिफारिशों के आधार पर ही हमारे विवि को सी श्रेणी में डाल दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय स्वागत योग्य है। यूजीसी आए, हमारे विश्वविद्यालय में मानकों की जांच करे। हम तैयार हैं। गलत मिलने पर यूजीसी को कार्रवाई का अधिकार है।
-विजय धस्माना, कुलपति, एचआईएचटी यूनिवर्सिटी
पता नहीं किस आधार पर विवि को सी श्रेणी दी। हमारे विवि का स्तर कम नहीं है। टंडन रिपोर्ट के बाद भी यूजीसी टीम आई थी, जिसने विवि को ए ग्रेड दिया था। जो भी आपत्तियां हम पर लगाई गई हैं, वे सिद्ध नहीं होतीं। हमने खुद को इंप्रूव किया है, यूजीसी टीम आए जांच करे।
-सुरेंद्र सिंह, कुलपति, गुरुकुल कांगड़ी विवि, हरिद्वार
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला स्वागत योग्य है। हमने जिस टंडन रिपोर्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, आज उसमें सफलता मिल गई है। हमारे विश्वविद्यालय में यूजीसी के मानकों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। अब हम यूजीसी जांच के लिए भी तैयार हैं।
-कमल घनसाला, अध्यक्ष, ग्राफिक एरा विवि