टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (टेस्को) को देश की अग्रणी इस्पात कंपनी बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले रूसी मोदी का शुक्रवार देर रात कोलकाता में निधन हो गया। वह 96 वर्ष के थे।
वर्ष 1939 में रोजाना 50 पैसे पाने वाले ट्रेनी से 1984 में कंपनी के चेयरमैन बनने का सफर तय करने वाले रुस्तमजी होमुसजी मोदी 1993 तक टेस्को के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रहे।
जमशेदपुर को इस्पात नगरी बनाने में उनकी प्रमुख भूमिका रही। टाटा समूह से रिटायरमेंट के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिंह राव ने रूसी मोदी को एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस का ज्वाइंट चेयरमैन बनाया था।
बाद में उन्होंने राजनीति में भी हाथ आजमाना चाहा लेकिन कामयाब नहीं रहे।
उद्योग जगत में अहम योगदान
उद्योग जगत में अहम योगदान के लिए मोदी को 1989 में पद्म भूषण से नवाजा गया। 17 जनवरी 1918 को मुंबई के एक पारसी परिवार में जन्मे रूसी मोदी ने क्राइस्ट कॉलेज, लंदन से ग्रेजुएशन करने के बाद टाटा समूह में नौकरी शुरू की थी।
करीब छह दशक तक उद्योग जगत से गहरा नाता रखने वाले मोदी अपनी शानदार जीवनशैली और मिलनसार मिजाज के लिए जाने जाते हैं। टाटा संस के अवकाश प्राप्त चेयरमैन रतन टाटा ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि रूसी मोदी अपने आप में एक संस्थान थे, जिनके नेतृत्व में टाटा स्टील की काफी तरक्की हुई।
अपने पूरे कार्यकाल के दौरान उन्हें कर्मचारियों से भरपूर सम्मान मिला। टाटा संस के ग्रुप चेयरमैन साइरस मिस्त्री ने कहा कि टाटा समूह को देश की सबसे प्रतिष्ठित कंपनी बनाने में मोदी का विशेष योगदान रहा।
जिंदा दिल कारपोरेट लीडर
रूसी मोदी को टाटा स्टील के मानव संसाधन प्रबंधन को उत्कृष्ट बनाने का श्रेय जाता है। कर्मचारियों के कल्याण के लिए उन्होंने कई नई योजनाएं शुरू कराईं। वह सहकर्मियों के साथ सीधा संवाद करने में यकीन रखते थे।
उनकी बातें और तौर-तरीके आज भी मानव संसाधन प्रबंधन में बेस्ट प्रैक्टिस के तौर पर पेश किए जाते हैं। टाटा स्टील रूरल डेवलपमेंट सोसायटी और टाटा फुटबॉल एकेडमी की स्थापना के पीछे उनकी प्रेरणा रही है।