रिजर्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने कहा कि महंगाई दर के दिसंबर में घटकर तीन साल के निचले स्तर 7.18 फीसदी पर आने के बावजूद यह अभी भी काफी असहज करने वाली और हमारे ‘कंफर्ट लेवल’ से ऊपर है। उन्होंने यहां एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि यदि चीजों को व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण से देखें, तो आर्थिक विकास की गति धीमी पड़ी है।
महंगाई दर भले ही अपने उच्चतम स्तर से नीचे आई है लेकिन अभी भी 7 फीसदी से अधिक का आंकड़ा असहज करने वाला है। सख्त मौद्रिक नीति के चलते विकास दर में तेज गिरावट का आरोप लगाने वालों पर निशाना साधते हुए सुब्बाराव ने कहा कि आर्थिक विकास में गिरावट के लिए रिजर्व बैंक की आलोचना की गई और हम इसको लेकर संवेदनशील हैं। लेकिन, प्रत्येक व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि जो लोग विकास दर में गिरावट के लिए आरबीआई की आलोचना कर रहे हैं, यह स्पष्ट है कि उन्हें बोलने के लिए एक उचित प्लेटफार्म मिला है।
लेकिन, जो लोग महंगाई से परेशान हैं, उनके पास अपनी आवाज उठाने के लिए कोई प्लेटफार्म नहीं है। मेरा मानना है कि रिजर्व बैंक और सरकार दोनों को इन लोगों की आवाज सुननी चाहिए। कच्चा तेल और खाद्य महंगाई के चलते सकल महंगाई दर में तेजी आ रही है। गौरतलब है कि आने वाले महंगाई दर के आंकड़े काफी अहम हैं, क्योंकि रिजर्व बैंक ने 29 जनवरी को अपनी पिछली मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरों और सीआरआर में कटौती कर मौद्रिक नीति में नरमी के संकेत दिए है।