रुपये में गिरावट से जुड़े घरेलू व ग्लोबल आर्थिक कारणों को देखते हुए आने वाले दिनो में डॉलर के भाव 70 रुपये तक जाने की आशंका जताई जा रही है।
देश के बढ़ते व्यापार घाटे व चालू खाते के घाटे और अमेरिकी और जापान की अर्थव्यवस्थाओं के फिर से मजबूती की तरफ बढ़ने के और भारतीय अर्थव्यवस्था की कमजोर होती स्थिति के बीच चालू वित्त वर्ष (2013-14) की समाप्ति पर डॉलर की कीमत 70 रुपये के स्तर को भी छू सकती है।
अमेरिकी फेड रिजर्व के राहत पेकैज वापस लेने से अंतरराष्ट्रीय कारोबार में डॉलर लगातार मजबूती पकड़ रहा है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है। एशियाई मुद्राओं में डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति काफी कमजोर बनी हुई है। मई से अबतक रुपया डॉलर के मुकाबले सात फीसदी टूट चुका है।
इतनी अधिक गिरावट एशिया की अन्य किसी मुद्रा में नजर नहीं आई है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की निकासी रुपये पर लगातार भारी पड़ रही है। निवेश को आकर्षित करने के सरकार के उपायों के फिलहाल नतीजे निकलते नजर नहीं आ रहे हैं।
सरकार की तरफ से चालू खाता घाटा को काबू में करने के लिए ठोस उपाय नहीं किए जाने से निवेशक उत्साहित नजर नहीं आ रहे हैं। इसके अलावा सोने के बढ़ते आयात और देश में ईंधन की मांग को पूरा करने के लिए तेल व गैस का भारी-भरकम आयात सरकार के लिए लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। यह रुपये पर भी दबाव बना रहा है।
डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार आती गिरावट को देखते हुए विश्लेषकों का अनुमान है कि डॉलर की विनिमय दर 60 रुपये से लेकर 70 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच सकती है।