एमबीबीएस डॉक्टरों को अब अगर पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) करना है तो उन्हें पहले गांवों में अपनी सेवा देनी होगी।
चिकित्सा की स्नातक पढ़ाई यानी एमबीबीएस करने के बाद डॉक्टर पीजी पाठ्यक्रम के तहत एमएस (सर्जरी) या एमडी (मेडिसिन) की पढ़ाई करने की जहमत में रहते हैं।
लेकिन अब सरकार ने निर्णय लिया है कि स्नातक डॉक्टरों को एक साल गांवों में सेवा देने के बाद ही पीजी करने के लिए योग्य माना जाएगा। ऐसा कर सरकार देश के गांवों में चिकित्सा सुविधा को पुख्ता करना चाहती है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने इस संबंध में प्रस्ताव को अपनी अनुमति दे दी है।
मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया इस मसले पर अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया में है। सरकार का यह फैसला आगामी शैक्षिक सत्र 2014-15 से लागू हो जाएगा, जिसके बाद कोई भी एमबीबीएस डॉक्टर गांव में सेवा देने के बाद पीजी की प्रवेश परीक्षा में बैठ सकेगा।