केंद्र सरकार ने रियायती सिलेंडरों की संख्या 6 से बढा़कर 9 कर दी है और डीजल की कीमत को बाजार के हवाले कर दिया है। डीजल की कीमत में वृद्घि या कमी का फैसला अब तेल कंपनियां करेंगी।
कैबिनेट ने एलपीजी और केरोसिन के दामों में वृद्घि नहीं की है। सिलेंडरों की संख्या बढ़ाना उपभोक्ताओं के लिए जहां राहत भरा माना जा रहा है वहीं डीजल की कीमत को बाजार के हवाले करने से आम आदमी पर तगड़ी मार पड़ने के पूरे आसार हैं।
कैबिनेट की बैठक के बाद गुरुवार को पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने बताया कि रियायती सिलेंडरों की संख्या 6 बढ़ाकर 9 कर दी गई है। उन्होंने बताया कि एलपीजी के दाम में वृद्घि नहीं की गई है।
मोइली ने बताया कि कैबिनेट ने डीजल के दाम को बाजार के हवाले करने का फैसला लिया है। अब तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार के आधार पर डीजल की कीमत के बारे में फैसला करेंगी।
इससे पहले आज चुनाव आयोग ने केंद्र सरकार को सिलेंडरों की संख्या की वृद्घि करने के लिए हरी झंडी दे दी। गौरतलब है कि तीन राज्यों में होने वाले विधान सभा चुनाव के कारण लगी आचार संहिता के कारण केंद्र ने चुनाव आयोग से अनुमति मांगी थी।
मोइली ने बुधवार को कहा था कि डीजल और रसोई गैस कीमतों की समीक्षा को लेकर सरकार गंभीर है। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने केलकर समिति की सिफारिशों को कैबिनेट की राजनीतिक मामलों की समिति के समक्ष पेश कर दिया है।
गौरतलब है कि केलकर समिति ने अपनी सिफारिशों में डीजल के दाम 4 रुपए और केरोसिन दो रुपए प्रति लीटर, एलपीजी 50 रुपए प्रति सिलेंडर बढ़ाने का सुझाव दिया है। बाजार मूल्य से कम कीमत पर ईंधन बिक्री के कारण चालू वित्त वर्ष में सरकार को 1 लाख 60 हजार करोड़ रुपए के राजस्व नुकसान की उम्मीद है।