देश के कृषि निर्यात में जैविक खाद्य उत्पादों का योगदान बहुत कम होने के मद्देनजर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय जैविक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ को निर्यात प्रतिबंध से छूट देने के लिए काम कर रहा है।
एसोचैम द्वारा जैविक खेती पर आयोजित चौथे राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के संयुक्त सचिव एके त्रिपाटी ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय इस बात के लिए प्रयास कर रहा है कि किसी जिंस के प्राथमिक उत्पाद पर कुछ रोक लगने के बावजूद जैविक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ के निर्यात पर प्रतिबंध न लगे।
घरेलू मानकों के अभाव के बारे में बात करते हुए त्रिपाठी ने कहा कि एक और चुनौती है कि भारत में कोई विश्वसीय सर्टिफिकेशन सिस्टम नहीं है और यह कृषि मंत्रालय को इस दिशा में काम करना होगा।
एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (एपीडा) के पूर्व चेयरमैन त्रिपाठी ने कहा कि भारत के जैविक खाद्य पदार्थों का निर्यात देश के बाहर हमेशा सवालों के घेरे में रहेगा जब तक कि घरेलू और निर्यात के बीच अंतर को खत्म नहीं किया जाता है।
उन्होंने कहा कि अगर घरेलू मानकों को अनिवार्य बनाया जाता है तो आपूर्ति ज्यादा होगी और निर्यात के लिए भी आपूर्ति ज्यादा होगी।
एपीडा के चेयरमैन संतोष सारंगी का कहना है कि भारत के लिए सबसे अहम चुनौती आर्गैनिक सर्टिफिकेशन सिस्टम की शुद्धता को बनाए रखना होगा। सारंगी ने कहा कि आर्गैनिक प्रोसेस में शामिल सभी भागीदारों जैसे किसानों, व्यापारियों और सर्टिफिकेशन बॉडीज को सर्टीफिकेशन सिस्टम की शुद्धता बनाए रखने के लिए काम करना चाहिए।