हाल ही में यूरोपियन यूनियन की तरफ से अल्फांसो आम पर लगाया गया प्रतिबंध हटाया गया है। अल्फांसो आम को भारत में हापुस नाम से भी जाना जाता है।
यह आम की एक खास किस्म है, जिसे मिठास, सुगंध और स्वाद के मामले में सबसे अच्छी किस्मों में से एक माना जाता है। यह आम अप्रैल से मई में होता है और हर आम का वजन 150 ग्राम से लेकर 300 ग्राम तक होता है।
इस आम का नाम अल्फांसो अफोंसो दि अल्बूकर्क के सम्मान में रखा गया है। अफोंसो दि अल्बूकर्क एक नोबलमैन और मिलिस्ट्री एक्सपर्ट थे, जिन्होंने भारत में पुर्तगाली कॉलोनी बसाने में मदद की थी।
ग्राफ्टिंग से पैदा हुआ हापुस
पुर्तगालियों ने सामान्य आम को और अधिक बड़ा करने के लिए ग्राफ्टिंग का इस्तेमाल किया। ग्राफ्टिंग कृषि विज्ञान की एक तकनीक है, जिसके जरिए एक पेड़ के टिश्यू दूसरे पेड़ में डाले जाते हैं।
इस आम की खास बात यह होती है कि यह पकने का बाद भी करीब एक सप्ताह तक रखा जा सकता है, जो इसके निर्यात को और भी आसान बनाता है।
अगर बात इसकी कीमत की करें तो ये आम भारत के सबसे महंगे आमों में से एक है, जिसे अधिकतर देश के पश्चिमी भागों में ही उगाया जाता है।
ऊंची कीमत और सुगंध है खासियत
अल्फांसो या हापुस भारत का सबसे महंगा आम है। इसकी खुश्बू दूर से ही आने लगती है। अगर बात इसकी कीमत की करें तो ये 1200 रुपए पेटी तक भी हो सकती है। पिछले साल इंदौर में 1200 रुपए पेटी के हिसाब से भी हापुस आम बिके थे। आपको बता दें कि इस पेटी में सिर्फ 12 आम आते हैं, जिसका मतलब है 100 रुपए का एक आम।
विदेशों में भारत के हापुस आम की काफी मांग है, लेकिन यूरोपियन यूनियन की तरफ से लगाए गए प्रतिबंध से उन्हें भारत के इस खास आम का स्वाद नहीं मिल पा रहा था। अब ये प्रतिबंध हटा लिया गया है, जिसकी वजह से यूरोप के लोग इस बार हापुस आम का स्वाद ले सकेंगे।