फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जब उस आम के पेड़ को काटा गया तो खून की धारा बह निकली

Wed, 29 Jan 2014 12:30 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञान कहता है कि पेड़ पौधों में भी जान होता है। लेकिन अक्सर हम इस बात की अनदेखी कर देते हैं। हम कह देते हैं पेड़ पौधों में खून नहीं होता है इसलिए वह निर्जीव है।
विज्ञापन


जब मर्जी होती है पेड़ की टहनी तोड़ देते हैं। अकारण ही धारदार हथियार से वार कर देते हैं। लेकिन एक पेड़ ऐसा था जिसे काटने पर खून की धारा बहने लगती थी। अब यह पेड़ सूख चुका है और इसकी लकड़ियों से बनाया गया दरवाजा संग्रहालय में इस बात की सच्चाई को बयां कर रहा है।

पढ़ें, एक झील जिसमें गड़ा है अरबों का खजाना

आप चाहें तो पानीपत के संग्रहालय में जाकर इस दरवाजे को देख सकते हैं। पेड़ से खून की धारा निकलने के पीछे जो घटना बताई जाती है उसके अनुसार पानीपत की तीसरी ल़ड़ाई 1761 में हुई थी। इस युद्घ में मराठों और अहमदशाह अब्दाली के बीच भयंकर युद्घ हुआ।
विज्ञापन


माना जाता है कि युद्घ में करीब सत्तर हजार सैनकों की मौत हुई और मराठे बुरी तरह हारे थे। कहते हैं कि सैनकों के खून से यहां की धरती लाल हो गयी थी। जहां यह युद्घ हुआ था वहां एक आम का पेड़ हुआ करता था।

पढ़ें, जनवरी के अंतिम सप्ताह का राशिफल

युद्घ के बाद अजीब सी घटना हुई। पेड़ को काटने पर लाल रंग का पानी निकलने लगता, देखने में यह खून जैसा लगता था। धीरे-धीरे यह पेड़ सूखता चला गया। माना जाता है कि पेड़ ने धरती से खून को अवशोषित कर लिया जिससे इसे काटने पर खून निकलने लगता था।

पेड़ के सूख जाने पर कवि पंडित सुगन चंद ने इसे खरीद लिया। इसकी लकड़ियों से दरवाजे बनाए गए। बाद में यह दरवाजा पानीपत म्यूजियम में लाकर रखा गया। जिस स्थान पर यह पेड़ हुआ करता था वह स्थान आज काला अंब के नाम से जाना जाता है।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें