भाजपा ने चुनावी बिगुल फूंका
हमेशा की तरह चुनावी राज्यों में सबसे पहले रैली/कार्यक्रम के माध्यम से चुनावी आगाज करने वाली भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में भी प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के बहाने चुनावी आगाज का सबसे पहले बिगुल बजाया। कहने को तो बनारस में 1500 करोड़ की परियोजनाओं को जनता के सुपुर्द करना था लेकिन निशाना उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनाव की रैलियों की नींव रखना था। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुरानी चुनावी रैलियों पर आप नजर डालेंगे, तो पाएंगे खासकर पूर्वांचल की रैलियों में उन्होंने भोजपुरी भाषा में लोगों से सीधे जोड़ने का प्रयास किया था। इस बार भी गुरुवार को बनारस में उन्होंने भोजपुरी बोलकर लोगों से जुड़कर अगले साल होने वाले चुनाव की पूरी भूमिका बना डाली।
राजनीतिक विश्लेषक एसएन कोहली कहते हैं कि कुछ महीनों बाद चुनाव हो और प्रधानमंत्री की इस तरीके की बड़ी परियोजनाओं वाले कार्यक्रम को चुनावी रैली जैसा मानने में कोई बुराई नहीं है। उनका कहना है सत्ता पक्ष का चुनावी आगाज कुछ इसी अंदाज में होता है। बड़ी-बड़ी परियोजनाएं शुरू की जाती हैं। पूरी हुई परियोजनाओं का शुभारंभ किया जाता है। और अगर केंद्र और राज्य की सरकारें दोनों एक ही पार्टी की हैं तो फिर विकास के वादे और किए गए तमाम कामों का लेखा-जोखा पेश किया जाता है। गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यही कहकर उत्तर प्रदेश में चुनावी आगाज कर दिया।
प्रियंका का दौरा कांग्रेस के लिए ऑक्सीजन
भारतीय जनता पार्टी ही नहीं बल्कि कांग्रेस ने भी चुनावी माहौल को समझने के लिए अपने नेताओं को जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में माहौल बनाने के लिए शुक्रवार से प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुंच चुकी हैं। क्योंकि प्रियंका गांधी बीते कुछ महीनों से उत्तर प्रदेश के कार्यकर्ताओं से सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। इसलिए प्रियंका गांधी का यह दौरा कांग्रेस के लिए ऑक्सीजन की तरह माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस में चल रहे अंदरूनी घमासान को शांत करना और फिर जनता के बीच जाकर चुनावी माहौल बनाना प्रियंका गांधी का मुख्य मकसद है। प्रियंका गांधी ही नहीं बल्कि कांग्रेस के कई नेता अगले एक से दो महीने के भीतर उत्तर प्रदेश का दौरा करने वाले हैं। प्रियंका गांधी के इस दो दिवसीय दौरे में बहुत ज्यादा इलाके तो नहीं शामिल हैं, लेकिन कांग्रेस सूत्रों का कहना है प्रियंका की दूसरी यात्रा में पूर्वांचल के और बुंदेलखंड के कुछ इलाके शामिल हो सकते हैं।
ओवैसी और राजभर का संयुक्त मोर्चा
भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के अलावा प्रदेश के बाहर से आने वाली पार्टियों के नेताओं में असदुद्दीन ओवैसी का नाम भी बहुत प्रमुखता से लिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री रहे ओमप्रकाश राजभर के संयुक्त मोर्चा में अहम भूमिका निभाने वाले ओवैसी उत्तर प्रदेश में अगले एक से दो महीने के भीतर कुछ बड़ी चुनावी रैलियां करने वाले हैं। हालांकि ओवैसी और ओमप्रकाश राजभर के संयुक्त मोर्चा की बैठक और रैलियां विशेष इलाकों में ही होंगी, लेकिन राजनैतिक हलचल पूरी तरीके से शुरू हो जाएगी।
उत्तर प्रदेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी के नेताओं का कहना है उनके संगठन के लोग जमीन पर उतर कर लगातार संघर्ष कर रहे हैं। खासकर पंचायत के चुनाव में पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए संघर्ष को उल्लेखनीय बताते हैं। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व मंत्री राजेंद्र चौधरी का कहना है कि प्रदेश के हर जिले तहसील शहर और गांव कस्बे के बूथ स्तर पर लगातार निगरानी कर रहे हैं। उनके कार्यकर्ता इन सभी जगहों पर सड़क पर उतरकर संघर्ष कर रहे हैं।
आम आदमी पार्टी भी तैयार
आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद संजय सिंह लगातार उत्तर प्रदेश में अपना संपर्क बनाए हुए हैं। संजय सिंह लगातार प्रदेश की राजधानी समेत अन्य इलाकों में जाकर नब्ज टटोलते हैं। हालांकि पार्टी की ओर से अभी कोई आधिकारिक तौर पर बड़े नेताओं की रैली और बड़े नेताओं का राज्य में आना तय नहीं हुआ है लेकिन जिस तरीके से सांसद संजय सिंह उत्तर प्रदेश में सक्रिय है उससे दो बातें सीधे तौर पर निकलती हैं। पहली पार्टी उत्तर प्रदेश में मजबूती के साथ चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और दूसरी विचारधाराओं के साथ अन्य पार्टियों के मिलने पर गठबंधन की भी तैयारियां चल रही है। संजय सिंह का समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलना दोनों पार्टियों के गठबंधन को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ाता रहा है।