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दिल्ली के दिल पर राज करते थे साहिब सिंह वर्मा, सड़क हादसे में हुई थी मृत्यु

Tue, 21 Jan 2020 01:41 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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साहिब सिंह वर्मा - फोटो : social media
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दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा की शख्सियत चट्टान सरीखी थी। मन में जो ठान लेते थे, उसे पूरा करके ही मानते थे। उनके लिए कोई भी काम कठिन नहीं था। सच का साथ आखिरी वक्त तक देते थे। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के सामने में अपनी बात वह साफगोई से रखते थे। अपने पिता को याद करते हुए सांसद प्रवेश सिंह वर्मा का गला भर आया। 

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साहिब सिंह वर्मा दिल्लीवालों के दिल पर राज करते थे। छोटी उम्र में ही वे आरएसएस में सक्रिय हो गए थे। 1977 में उन्होंने पहला चुनाव लड़ा और पार्षद चुने गए। 1993 में विधानसभा चुनाव जीतकर वे भाजपा सरकार में शिक्षा और विकास मंत्री बने।

पार्टी ने तीन साल बाद 1996 में उनको दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दी। वे करीब ढाई साल तक मुख्यमंत्री रहे। दिल्ली की सत्ता कांग्रेस के पास चली जाने के बाद भाजपा ने उनको केंद्र में बुला लिया।
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1999 का लोकसभा चुनाव उन्होंने बाहरी दिल्ली सीट से दो लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीता। वे एनडीए सरकार में श्रम मंत्री भी रहे। नौकरशाही पर लगाम लगाए हुए उन्होंने कर्मचारी भविष्य निधि पर ब्याज की दरों को कम करने से रोका। उनके इस काम को ए बुल इन चाइना शॉप कहकर सराहा गया।

साहिब सिंह वर्मा का जन्म बाहरी दिल्ली के मुंडका गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। साहिब सिंह वर्मा की 2007 में राजस्थान में एक सड़क हादसे असामयिक मृत्यु हो गई। उस वक्त वह सीकर जिला के नीमकाथाना में एक स्कूल का भूमि पूजन कर टाटा सफारी कार से दिल्ली वापस लौट रहे थे। हादसा अलवर जिले में हुआ था और साहिब सिंह की गाड़ी की सामने से आ रहे ट्रक से टक्कर हो गई थी।

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