क्या हुआ था
दरअसल, दिल्ली भाजपा नेता विजेंद्र गुप्ता ने कुछ दस्तावेजों के आधार पर यह दावा किया था कि दिल्ली सरकार बसों की खरीद में भारी अनियमितता बरत रही है। वह जिन कंपनियों से बसें खरीद रही है, उन्हीं कंपनियों को इन्हीं बसों के रखरखाव का ठेका भी दे रही है, जबकि डीटीसी के पास खुद अपना सेंटर है जिसमें बसों के रखरखाव का पूरा सिस्टम मौजूद है। उन्होंने आरोप लगाया था कि इस प्रकार दिल्ली सरकार पर बसों की खरीद और रखरखाव में 5000 करोड़ रुपये का आरोप लगाया था।
जांच रिपोर्ट ने क्या पाया
विजेंद्र गुप्ता के इन आरोपों के बाद दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने एक कमेटी का गठन कर आरोपों की जांच कराई। कमेटी ने दिल्ली सरकार से बसों की खरीद से जुड़ी 400 फाइलें मंगवाकर खरीद प्रक्रिया की पूरी जांच प्रक्रिया का बारीकी से अध्ययन किया। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बसों की खरीद में टेंडर जारी करने से लेकर खरीद प्रक्रिया के अब तक के चरण में कहीं कोई घोटाला नहीं हुआ है। आम आदमी पार्टी ने इसे अपनी जीत बताया है।
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि भाजपा नेतृत्व द्वारा गठित कमेटी ने ही यह साफ कर दिया है कि बसों की खरीद में कोई अनियमितता नहीं बरती गई। इसी से साफ हो जाता है कि भाजपा केवल आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति करती है। उसे भी आम आदमी पार्टी की तरह स्वच्छ राजनीति करनी चाहिए।
लेकिन यहां है पेंच
दिल्ली विधानसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के उपराज्यपाल द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में बसों के रखरखाव अनुबंध में सामान्य वित्तीय नियम 2017 का गंभीर उल्लंघन पाया है। सरकार ने सुनिश्चित किया कि एएमसी अनुबंध की निविदा प्रक्रिया में केवल दो कंपनियां ही भाग ले सकें। ‘रेफरेंस फॉर प्रपोजल’ में कोई बेंचमार्क मूल्य निर्धारित नहीं किया गया जिससे बोली में ज्यादा कंपनियों ने भाग नहीं लिया। इससे केवल दो कंपनियों को ही लाभ देने की साजिश रची गई।
गुप्ता ने कहा कि डीटीसी द्वारा बुनियादी सुविधाओं, बस चालक, कंडक्टर, ईंधन आदि की सभी आवश्यकताओं को पूरा किए जाने के बावजूद इन कंपनियों को हर महीने 30 करोड़ रुपये दिए जाने थे, जबकि अन्य आवश्यकताओं को वारंटी के तहत पूरा किया जाना था। यह सब कुछ उचित आकलन के बिना किया जा रहा था।