दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को इसके बाबत स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ एक हाई लेवल मीटिंग की। इस मीटिंग में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, मुख्य सचिव और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ अन्य शीर्ष अधिकारी उपस्थित थे। इस मीटिंग में मौजूद रहे एक अधिकारी के अनुसार सरकार तीसरी लहर के आने के समय का पूर्वानुमान कर लहर के आने के पहले अपनी तैयारियां पूरी करना चाहती है, जिससे इसके कहर से मासूम बच्चों को बचाया जा सके। इसके लिए अस्पतालों, बिस्तरों और अन्य सभी जरूरी चीजों की उपलब्धता सुनिश्चित रखने की रणनीति अपनाई जा रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक दिल्ली सरकार भारी संख्या में वैक्सीनेशन कर राजधानी में कोरोना की तीसरी लहर के असर को कम करना चाहती है। इसके लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन देने की रणनीति अपनाई जाएगी। दिल्ली में इस समय वैक्सीन की भारी कमी है। सरकार इसके लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाएगी।
लेकिन राज्यों को कोरोना वैक्सीन उपलब्ध कराने में केंद्र की सीमित क्षमता को देखते हुए दिल्ली सरकार इसके प्राइवेट कंपनियों से खरीदने को विचार कर रही है। बैठक में विदेशी कंपनियों से सीधे वैक्सीन के आयात करने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया है। केंद्र सरकार के सहयोग के बाद भी अगर दिल्ली में वैक्सीन की कमी बनी रहती है तो दिल्ली सरकार इसके लिए अमेरिकी और रूसी कंपनियों से वैक्सीन की खरीद पर भी विचार कर सकती है। इसके बाबत जल्द ही निर्णय ले लिया जायेगा।
टास्क फोर्स का गठन
इस बैठक के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि दिल्ली में कोरोना की तीसरी लहर के आने की संभावनाओं और इसे रोकने को लेकर एक टास्क फोर्स का गठन किया जायेगा। इस टास्क फ़ोर्स में विभिन्न क्षेत्रों के एक्सपर्ट शामिल होंगे। यह टास्क फोर्स तीसरी लहर को लेकर आवश्यक सुविधाओं और जरूरत की सभी संभावनाओं पर विचार कर सरकार को सलाह दे सकेगी।
दिल्ली सरकार का अनुमान है कि अगर कोरोना की तीसरी लहर आई तो उस दौरान दिल्ली में 30 से 40 हजार बेड्स की आवश्यकता पड़ सकती है। इसके लिए आवश्यक संसाधनों को जुटाने की कोशिश की जायेगी। इस दौरान ऑक्सीजन की कमी न होने पाए इसके लिए विभिन्न अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट्स को लगाया जाएगा।