मैं अध्ययन करते वक्त इसी विषय पर केंद्रित रहा कि हिमालयी क्षेत्र में अंधत्व निवारण कैसे हो। मुझे वहां मोतियाबिंद ऑपरेशन की सबसे उन्नत तकनीक के बारे में जानकारी हुई। वह तकनीक प्रत्यारोपित अंतःक्रियात्मक लेंस पर आधारित थी। लेकिन उस तकनीक की सबसे बड़ी दिक्कत थी कि वह बहुत महंगी थी। मैं वर्षों तक इसी जुगत में लगा रहा कि कैसे इसे सर्व सुलभ बनाया जाए, ताकि नेपाल और भारत के गरीब लोग इससे लाभान्वित हों।
वर्षों की मेहनत के बाद आखिरकार मुझे सफलता मिली और मैंने उस तकनीक को नब्बे फीसदी तक सस्ता करने में सफलता प्राप्त कर ली, जिसे आगे चलकर तीस से ज्यादा देशों में स्वीकार किया गया। हजारों रुपयों का खर्च चंद सौ रुपयों तक सिमट गया। गरीबों की सेवा के लिए मैंने काठमांडू में विश्व स्तरीय सुविधाओं से युक्त तिलगंगा आंख अस्पताल की स्थापना की है। साथ ही मैं अपनी टीम के साथ मिलकर नेपाल के सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचकर लोगों की आंखों का उपचार करता रहता हूं।
हम सभी एक उद्देश्य के साथ धरती पर आए हैं और यह बहुत खास बात है कि मुझे एहसास हो गया है कि मेरा उद्देश्य क्या है। मैं दुनिया भर में कई अन्य केंद्र स्थापित करने की कोशिश कर रहा हूं। मुझे उन अलग-अलग रोगियों से ताकत मिलती है, जो देखने में सक्षम नहीं होते और इलाज के महज 12 घंटे बाद जब उनकी आंखों की पट्टी खुलती है, तो दुनिया की खूबसूरती निहार रहे होते हैं। उनके चेहरे पर उस वक्त की मुस्कराहट वास्तव में मेरे लिए एक शक्तिशाली क्षण होता है, बहुत ही शक्तिशाली क्षण! कई लोग ताउम्र इसके लिए तरसते हैं, यह ताकत किस्मत वालों को नसीब होती है। मैं कितना खुशनसीब हूं कि मेरे पास इसकी बहुतायत है।
-पद्मश्री से सम्मानित नेपाली डॉक्टर के साक्षात्कारों पर आधारित।