पन्ना की खदानों से अब तक का सबसे बड़ा हीरा 1961 में निकला था। वह हीरा 44.55 कैरट का था। पन्ना के सरकारी डायमंड ऑफिस के वैल्युअर (पारखी) अनुपम सिंह ने बताया कि मोतीलाल ने हीरा उनके पास जमा करा दिया है। इसकी नीलामी अगले साल जनवरी में की जाएगी। नीलामी में मिलने वाली रकम से सरकारी रॉयल्टी व टैक्स काटने के बाद बची राशि मोतीलाल को दे दी जाएगी।
बता दें कि हीरे की बिक्री के बाद साढ़े ग्यारह प्रतिशत रॉयल्टी एवं 1 प्रतिशत इनकम टैक्स काटा जाता है। अगर पैन कार्ड नहीं है तो 20 प्रतिशत तक टैक्स काटा जाता है। अनुपम सिंह ने कहा कि यह तो तय है कि हीरे की कीमत करोड़ों में है। अब आधिकारिक मूल्य तय होने के बाद नीलामी किस राशि की होती है यह तो नीलामी के बाद ही पता चलेगा। भले ही हीरे से कितनी रकम हाथ आनी है यह मोतीलाल को न पता हो, लेकिन मोतीलाल के दिन जरूर बदल गए हैं। मोतीलाल का कहना है कि नीलामी से मिलने वाली राशि में अपने साथियों को भी हिस्सा देगा।
पन्ना में ये पिछले दो महीने में दूसरा बड़ा हीरा मिला है। इससे पहले 14 सितंबर को भी सरकोहा गांव में एक किसान को खेत जोतते समय 12.58 कैरेट का हीरा मिला था, जिसकी कीमत करीब 30 लाख रुपये आंकी गई थी। पन्ना जिले को हीरे का भंडार माना जाता है और एक अनुमान के अनुसार यहां की जमीन में करीब 12 लाख कैरेट के हीरे छिपे हुए हैं।