मध्य प्रदेश में चुनाव प्रेक्षक के कथित दुर्व्यवहार से दुखी होकर नौकरी से इस्तीफा देने वाली महिला पुलिस सब इंस्पेक्टर ने बीबीसी से कहा कि वो अपने फैसले पर अडिग हैं और हर तरह की लडाई के लिए भी तैयार हैं।
दरअसल ये मामला प्रदेश के राजगढ जिले के मलावर थाने का है। विधानसभा चुनाव ड्यूटी के दौरान महिला पुलिस सब इंस्पेक्टर ने एक चुनाव प्रेक्षक की गाडी को रोका था।
थाने की इंचार्ज अमृता सोलंकी ने चुनाव प्रेक्षक के कथित व्यवहार से दुखी होकर एक सप्ताह पहले पुलिस महकमे को अलविदा कह दिया था।
हालांकि पुलिस विभाग ने अब तक उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया है। लेकिन उनके इस्तीफे के आधार पर जांच शुरू हो चुकी है।
अमृता ने अपना इस्तीफा पुलिस विभाग के आला अफसरों को भेजने के साथ साथ सोशल नेटवर्क साइट फेसबुक पर भी पोस्ट कर दिया था।
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फेसबुक पर इस्तीफा
उनका इस्तीफा फेसबुक पर पोस्ट होते ही लोगों ने उनकी हिम्मत की दाद देना शुरू कर दिया।
देखते ही देखते 860 से ज्यादा लाइंकिंग के साथ दर्जनों कमेंट भी मिले। उनके इस्तीफे वाली पोस्ट को 352 लोगों ने शेयर भी किया।
अमृता को इस्तीफा वापस लेने के लिए मनाया जा रहा है।
लेकिन अमृता ने कहा कि वो अपने फैसले पर अडिग हैं और हर तरह की लडाई के लिए भी तैयार हैं।
फेसबुक में पोस्ट इस्तीफे में दावा किया गया है कि थाना इंचार्ज होने के नाते अमृता सोलंकी रात में जयपुर को जबलपुर को जोडने वाले राष्ट्रीय राज मार्ग संख्या 12 पर वाहनों की चेकिंग का काम कर रही थी।
लाल बत्ती
इसी दौरान रात बारह बजे के करीब लाल बत्ती लगी एक गाडी आई जिसकी लाल बत्ती बुझी हुई थी।
अमृता के मुताबिक यह जानने के लिए लाल बत्ती का कोई दुरुपयोग तो नहीं कर रहा, उन्होंने उसे रोक दिया। इससे उसमें सवार चुनाव प्रेक्षक गया प्रसाद नाराज हो गए।
इस्तीफे के अनुसार प्रेक्षक ने उनके साथ अपशब्दों का प्रयोग कर वरिष्ठ अधिकारी से कार्रवाई कराने और ऐसा नहीं होने पर मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने की धमकी दी।
अमृता के मुताबिक प्रेक्षक ने उसी समय फोन पर एसपी राजगढ से बात की। अगले दिन उन्हे थाने की ड्यूटी से हटा दिया गया।
इस्तीफे में लिखा है कि इस घटना से उन्हें मानसिक पीडा हुई है। इस कारण वह अवसाद की स्थिति में आ गई हैं। इस वजह से वह बिना एक महीने का नोटिस दिए इस्तीफा दे रही हैं।
जवाबदारी
अमृता ने कहा, "निष्पक्ष चुनाव कराना चुनाव आयोग की जवाबदारी है ना कि पुलिस की। पुलिस विभाग आखिर कितना दबाव झेले। सिर्फ इसलिए कि हम कानून एवं व्यवस्था बनाए रखना चाहते हैं। इसके लिए हम क्या अपना स्वाभिमान गिरवी रख कर नौकरी करें।"
वो कहती हैं, "मेरी लडाई मेरे एसपी, आईजी या विभाग से नहीं है। मेरी शिकायत यह है कि दूसरे विभाग के अधिकारी पुलिस विभाग को समझते क्या है। हम लोग 20 से 22 घंटे नौकरी करते हैं उसके बाद भी दबाव झेलते हैं।"
अमृता ने कहा, "चुनाव प्रेक्षक को तो मुझे शाबाशी देनी चाहिए थी कि मैं कितनी मुस्तैदी से अपनी डयूटी निभा रही हूं। उल्टे वो रात की साढे बारह बजे मुझे अपमानित कर मेरे एसपी से मेरी शिकायत कर रहे थे।"
अपने इस्तीफे में अमृता सोलंकी ने लिखा है, "सम्मानजनक जीवन जीने के संवैधानिक अधिकार के विरूद्ध प्रेक्षक के कृत्य पर न्यायालय महिला आयोग व चुनाव आयोग की शरण ले सकूं, इसलिए त्यागपत्र जरूरी है।"
इस्तीफा मंजूर नहीं
इस्तीफे में अमृता लिखती हैं कि 'नौकरी किसी को बुरी नहीं लगती, लेकिन नौकरी करते हुए अपने स्वाभिमान पर हुए इस आघात को मैं सहन नहीं कर पा रही हूं।'
पुलिस विभाग ने अब तक उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया है। उनके इस्तीफे के आधार पर जांच शुरू हो चुकी है। अमृता को मनाया जा रहा है कि वह अपना इस्तीफा वापस ले लें।
हालांकि इस मसले पर विभाग की प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की गई पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पायी।
मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने जरूर इस बात की पुष्टि की है कि उन्हें महिला एसआई की ओर से पत्र मिला है जिसे उचित कार्यवाही के लिए संबंधित विभाग को भिजवा दिया है।
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