गैंगरेप की झूठी शिकायत करना एक महिला को भारी पड़ गया। कोर्ट ने थाने में गैंगरेप की झूठी शिकायत दर्ज कराने के आरोप में महिला को 10 साल की सजा सुनाई है।
मामला मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले का है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक आरोपी महिला ने 8 मार्च 1998 को जिले के जतारा थाने में अपने साथ गैंगरेप की शिकायत दर्ज कराई थी।
पुलिस ने इस मामले में आरोपी छिंगा, मुश्ताक अली, सुरेश लोहार और बबलू अहिरवार को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया।
कोर्ट ने 22 अप्रैल 1999 को परिस्थिति जन साक्ष्य के आधार पर आरोपी बबलू को सजा सुनाई थी और सबूतों के अभाव में तीन आरोपी छिंगा, मुश्ताक और सुरेश को मामले से बरी कर दिया था।
इसके बाद सुनवाई के दौरान महिला के गैंगरेप की झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने और गवाही के दौरान अपने बयान से मुकर जाने के कारण विशेष न्यायाधीश के निर्देश पर मुख्य न्यायायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में वर्ष 1999 में प्रकरण पंजीबद्ध किया गया था।
इस मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद कोर्ट ने अपने फैसले में आरोपी सावित्री को दोषी पाते हुए दस साल के कारावास की सजा सुनाई।