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व्यापमः इन 5 सवालों के जवाब तलाश पाएगी CBI

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मध्यप्रदेश के कुख्यात व्यापम घोटाले की जांच करने पहुंची सीबीआई की टीम ने अपनी कार्यवाही शुरू कर दी है। लेकिन देशभर को हिला कर रख देने वाले इस घोटाले से पर्दा उठाना और असली गुनहगारों तक पहुंचना सीबीआई के लिए इतना आसान नहीं होगा।
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एक हजार से ज्यादा फर्जी नियुक्तियों, ढाई हजार आरोपियों और तीन दर्जन से ज्यादा मौतों के बीच व्यापम का सच सामने लाना सीबीआई के लिए खासा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ सवालों पर जिनके जवाब सीबीआई को आने वाले वक्त में देने पड़ सकते हैं।

व्यापम घोटाले की तह तक पहुंचने की चुनौती
व्यापम की जांच में जुटी सीबीआई के सामने सबसे बड़ी चुनौती व्यापम घोटाले की तह तक पहुंचने की है। हाइकोर्ट द्वारा गठित एसआईटी के अधीन काम कर रही एसटीएफ भी अभी तक व्यापम घोटाले की व्यापकता का पता नहीं लगा सकी थी।
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छात्रों के मेडिकल में प्रवेश से शुरू हुआ यह घोटाला प्रदेश लोक सेवा आयोग से इतर होने वाली हर नियुक्ति तक फैला हुआ था। जिसमें शिक्षक, पुलिस, फूड इंस्पेक्टर, विभिन्न विभागों में क्लर्क और अन्य नियुक्तियां फर्जी तरीके से की गई थी।

चार साल से जारी जांच के बीच एसटीएफ अभी भी सीधे तौर पर यह कहने की स्थिति में नहीं थी कि यह बता सके घोटाला किस किस विभाग में किस स्तर तक हुआ। ऐसे में सीबीआई के लिए बड़ी चुनौती यह भी है कि वह यह स्पष्ट करे कि घोटाले की जड़ किस विभाग में कहां कहां तक फैली हुई हैं। कितने लोगों की नियुक्ति व्यापम में चल रहे फर्जीवाड़े के तहत हुई।

असली गुनहगारों तक पहुंच पाएंगे सीबीआई के हाथ

व्यापम घोटाले को लेकर बेशक बेशुमार खबरें सामने आती रही हों लेकिन एक छुपा सच ये भी है कि अभी तक इसके असली गुनहगारों तक किसी जांच एजेंसी के हाथ नहीं पहुंच सके हैं।

सैकडों लोगों की फर्जी नियु‌क्ति और हजारों छात्रों को मेडिकल और इंजीनियरिंग में प्रवेश दिलाने वाले इस महा घोटाले में अभी तक जितने लोग एसटीएफ के हत्‍थे चढ़े हैं उन्हें छोटी मछली ही बताया जा रहा है। घोटाले में अभी तक सबसे बड़ा नाम राज्य के पूर्व शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा का ही सामने आया है।

जबकि विपक्ष आरोप लगाता रहा है कि लक्ष्मीकांत तो एक मोहरा थे घोटाले के असली गुनहगार तो कोई और ही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह तो सीधे सीधे मुख्यमंत्री शिवराज चौहान और उनके परिवार पर भी आरोप लगाते रहे हैं। ऐसे में सीबीआई के लिए इसके असली गुनहगारों तक पहुंचना बड़ी चुनौती है।

क्या सामने आ पाएगा संदिग्‍ध मौतों का सच
फर्जी नियुक्तियों और एडमिशन से ज्यादा व्यापम घोटाला इससे जुड़े आरोपियों और अन्य लोगों की संदिग्‍ध हालात में हुई मौतों के लिए चर्चा में आया। एक-एक कर हुई मौतों ने पूरे देश में हाहाकार मचा दिया‌। इसके चलते ही मामले को सीबीआई को सौंपा गया।

ऐसे में एक बड़ा सवाल ये भी है कि क्या सीबीआई उन 34 लोगों की मौत का सच दुनिया के सामने ला पाएगी जो व्यापम घोटाले से जुड़ा होने के कारण एक एक कर मौत की नींद सो गए। क्या सीबीआई कभी उन मौत की असली वजह ढूंढ पाएगी जिसे सरकार सामान्य मानती है और परिजन संदिग्‍ध।
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फरार आरोपियों को गिरफ्तार कर पाएगी सीबीआई

व्यापम में एसटीएफ अभी तक 1500 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। जबकि हजार से ज्यादा लोग फरार बताए जा रहे हैं। इनमें से कई लोगों पर एसटीएफ ने इनाम भी घोषित कर रखा है। इनमें से कई लोग ऐसे भी हैं जिन्हें एसटीएफ प्रमुख आरोपियों के तौर पर देखती थी।

इन्हीं में एक छात्र बृजेन्द्र रघुवंशी भी है जो विदिशा के एक भाजपा नेता का बेटा है। लंबे समय से फरार चल रहे बृजेन्द्र पर पुलिस ने पांच हजार का ईनाम घोषित कर रखा है। ऐसे ही हजार से ज्यादा आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर हैं जिनके पकड़े जाने के बाद ही घोटाले की परतें पूरी तरह साफ हो सकेंगी।

क्या निष्पक्षता से काम कर पाएगी जांच एजेंसी
आमतौर पर सीबीआई की पहचान बिना झिझक बड़ी हस्तियों पर हाथ डालने वाली रही है। लेकिन कई बार देश की इस सबसे बड़ी जांच एजेंसी पर भी पक्षपात और दबाव में आने की उंगलियां उठती रही हैं। कोलगेट और विभिन्न मामलों में देश इसका नजारा देख चुका है।

इसके अलावा उस पर सत्ता के दबाव में काम करने का आरोप भी लगता रहा है। ऐसे में केन्द्र और प्रदेश में एक ही पार्टी की सरकार होने के बाद सीबीआई कितनी निष्पक्षता से व्यापम घोटाले की जांच कर पाती है इसका जवाब उसे खुद ही देना होगा।

इससे पूर्व में हाइकोर्ट के निर्देश पर घोटाले की जांच कर रही एसटीएफ पर भी पैसे लेकर आरोपियों के नाम बढ़ाने और निकालने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में सीबीआई अपना दामन बचाकर घोटाले की कितनी सच्चाई सामने ला पाती है पूरे देश की निगाह इस पर होगी।
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