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व्यापम: इस तरह होता था फर्जीवाड़ा, पढ़ेंगे तो रह जाएंगे दंग

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मध्यप्रदेश के बदनाम व्यापमं घोटाले में किस तरह हजारों लोगों को फर्जीवाड़ा कर फायदा पहुंचाया गया उसका एक एक कर खुलासा हो रहा है। शुरूआत में मामले का खुलासा करने वाले आशीष चतुर्वेदी ने इस घोटाले की एक के बाद एक कडियों का जो खुलासा किया है उसे सुनकर हर किसी के होश उड़ जाएं।
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आशीष ने बताया कि किस तरह व्यापमं के तहत परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों और दलालों ने पूरे सिस्टम को हाइजैकर कर लिया। आशीष के अनुसार पीएमटी की परीक्षा देने वाले एक छात्र ने उसे बताया कि जिस समय दिल्ली में उसकी पीएमटी की प्रवेश परीक्षा चल रही थी तब वह भोपाल के डीबी मॉल में बैठकर मूवी देख रहा था।

उसने यह भी बताया कि कि दलालों के कहने पर छात्र एक के बाद एक दो मूवी देखते थे। वहीं इस दौरान उनके नाम पर परीक्षा हॉल में कोई और परीक्षा दे रहा होता था। यह फर्जीवाडा पूरे देश में चलता था।
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चार स्तर पर होता था फर्जीवाड़ा

छात्रों को परीक्षा के समय मूवी दिखाने का दलालों का मकसद ये रहता था ताकि परीक्षा के समय उन्हें कोई देख न ले, न ही वो सीसीटीवी कैमरे की पकड़ में आ जाएं। कई बार झगड़ा होने पर भी छात्रें का नाम सामने आने का डर रहता था इसलिए सबको अलग अलग जगह पर मूवी देखने के लिए भेज दिया जाता था।

आशीष ने एक ऐसे ही छात्र बृजेन्द्र रघुवंशी के बारे में बताया कि साल 2010 में उसकी संदेहास्पद गति‌विधियों को देखते हुए उसने उससे दोस्ती की और धीरे धीरे वह पूरे राज्य में चल रहे इस रैकेट की तह तक पहुंचा।

आशीष के अनुसार व्यापमं में हेराफेरी चार तरह से की जाती थी। पहला तरीका तो ये था कि परीक्षा में किसी दूसरे को बैठाकर अभ्यर्थी को पास कराया जाता। दूसरा, किसी ऐसे व्यक्ति को जो पूर्व में उक्‍त परीक्षा पास कर चुका हो और पढ़ाई में होनहार हो उसे परीक्षा देने वाले छात्रों के बीच में बैठाया जाता जिससे वह सबको नकल कराकर पास करा देता।
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हर पद के लिए तय थे अलग अलग रेट

तीसरा तरीका ये था कि परीक्षा के बाद रीचेकिंग के नाम पर छात्र के नंबर बढ़ा दिए जाते जिससे वो पास हो जाता। चौथा और अंतिम तरीका ये था कि परीक्षा के दौरान ओएमआर सीट खाली छोड़ दी जाती जिसे बाद में सोल्वर से भरवा दिया जाता।

आशीष ने बताया कि इस महाघोटाले के खुलासे के बाद उसे लगातार धमकियां मिलती रही लेकिन वह अड़ा रहा। उसने घोटाले की परत दर परत उधेड़ने के लिए आरटीआई को हथियार बनाया। आशीष ने परीक्षा में पास करवाने के रेट का भी खुलासा किया।

आशीष के अनुसार पूर्व में सिर्फ मे‌डिकल और इंजीनियरिंग की परीक्षाएं कराने वाले व्यापमं ने साल 2007 से राज्य स्तरीय नौकरियों के लिए भी परीक्षा करानी शुरू कर दी। जिसमें फूड इंस्पेक्टर के लिए 20 से 22 लाख और पुलिस में सब इंस्पेक्टर जैसे पद के लिए 15 से 20 लाख रुपए वसूले जाते थे।
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