प्रशासन ने वन भूमि से हटाया अतिक्रमण ग्रामीण नाराज
विदिशा जिले के ग्यारसपुर क्षेत्र के हिम्मतपुर गांव में गुरुवार को वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों और वन विकास निगम की टीम के बीच विवाद की स्थिति बन गई। कार्रवाई के दौरान खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई के दौरान ट्रैक्टर चलने से मक्का, धान और उड़द की फसल प्रभावित हुई है। कुछ ग्रामीणों ने सोयाबीन की फसल को नुकसान पहुंचाने के लिए दवा डालने का आरोप भी लगाया है।
ग्रामीणों के विरोध में महिलाएं भी शामिल रहीं। उनका कहना था कि कई परिवार लंबे समय से खेती के जरिए अपना जीवन चला रहे हैं। ऐसे में यदि तैयार फसल खराब होती है तो परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है। महिलाओं ने कार्रवाई के समय और तरीके को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि खेतों में फसल खड़ी होने के बावजूद उसे हटाने की कार्रवाई से गरीब परिवारों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार हिम्मतपुर क्षेत्र में करीब 10 से 12 आदिवासी परिवार लंबे समय से रहकर खेती कर रहे हैं। इन परिवारों का कहना है कि उनकी आजीविका मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है। कार्रवाई के दौरान फसल प्रभावित होने से उन्हें आगामी दिनों में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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वन विभाग की ओर से कार्रवाई को अतिक्रमण हटाने की नियमित प्रक्रिया बताया गया है। वन विकास निगम की टीम डिप्टी रेंजर महेंद्र गौर के नेतृत्व में हिम्मतपुर पहुंची थी। विभाग के मुताबिक गांव के आसपास करीब 45 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण है। अधिकारियों का कहना है कि इस क्षेत्र में अलग-अलग वर्गों के लोगों ने वन भूमि पर कब्जा कर खेती शुरू कर रखी है। अभियान के तहत अब तक करीब 7 हेक्टेयर क्षेत्र को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है। डिप्टी रेंजर के अनुसार वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने का अभियान पिछले मानसून सीजन से चल रहा है। विभाग का कहना है कि जिन लोगों ने वन भूमि पर फसल बोई थी, उन्हें पहले ही अतिक्रमण हटाने और फसल संबंधी कार्रवाई की जानकारी दी गई थी।
वन विकास निगम के अधिकारियों के मुताबिक निगम की जमीन के करीब 400 हेक्टेयर क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर अतिक्रमण है। विभाग का दावा है कि अभियान के दौरान अब तक 148 हेक्टेयर से अधिक जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अभियान शासन के निर्देशों के अनुसार चलाया जा रहा है और कार्रवाई में किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा। विभाग का कहना है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान नुकसान को लेकर कुछ लोग आरोप लगाते हैं, लेकिन अभियान में सभी अतिक्रमणकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
इधर, सरपंच प्रतिनिधि गोविंद सिंह गुर्जर ने कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि कार्रवाई मुख्य रूप से गरीब परिवारों के अतिक्रमण पर की जा रही है, जबकि प्रभावशाली लोगों के कब्जों पर समान तरीके से कार्रवाई नहीं हो रही। उन्होंने पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और सभी अतिक्रमणों पर एक जैसी कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन ने बन भूमि से हटाया अतिक्रमण ग्रामीण नाराज