नकली सोने को असली बताकर एसबीआई के करोड़ों डकारे
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विदिशा में करोड़ों रुपये के कथित गोल्ड लोन घोटाले की जांच के सिलसिले में सोमवार को सीबीआई ने कई ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई की जद में शहर के प्रमुख सर्राफा कारोबारी प्रतिष्ठान और मामले से जुड़े अन्य संदिग्ध लोग आए हैं। छापेमारी की खबर फैलते ही सर्राफा बाजार और बैंकिंग क्षेत्र में हलचल मच गई।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने कथित रूप से नकली सोना गिरवी रखकर भारतीय स्टेट बैंक से करोड़ों रुपये का गोल्ड लोन हासिल किया। आरोप है कि असली सोने की जगह तांबा और पीतल जैसी धातुओं पर सोने की परत चढ़ाकर उन्हें सोने के आभूषण के रूप में प्रस्तुत किया गया।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस प्रक्रिया में फर्जी वेल्यूएशन सर्टिफिकेट का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि कुछ ज्वेलर्स द्वारा जारी प्रमाण पत्रों के आधार पर नकली गहनों को उच्च गुणवत्ता का सोना बताकर बैंक में जमा कराया गया और उसके एवज में लोन स्वीकृत कराए गए। मामला सामने आने के बाद एसबीआई प्रबंधन ने कार्रवाई करते हुए शाखा प्रबंधक और एक ऋण अधिकारी को निलंबित कर दिया है। बैंक के आंतरिक ऑडिट के दौरान कथित अनियमितताओं का पता चलने पर मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी गई, जिसके बाद जांच सीबीआई को सौंपी गई।
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सोमवार को सीबीआई की अलग-अलग टीमों ने शहर के विभिन्न प्रतिष्ठानों और संदिग्धों के ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की। इस दौरान लैपटॉप, हार्ड डिस्क, गोल्ड टेस्टिंग उपकरण, दस्तावेज और अन्य सामग्री जब्त की गई है। कुछ लोगों से पूछताछ भी की गई। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी वेल्यूएशन सर्टिफिकेट किस प्रकार जारी किए गए, लोन स्वीकृति प्रक्रिया में किसकी क्या भूमिका रही और इस पूरे नेटवर्क से किन-किन लोगों को लाभ पहुंचा।
सूत्रों के मुताबिक प्रारंभिक जांच में कई संदिग्ध गोल्ड लोन खातों की जानकारी सामने आई है। सीबीआई जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच करा रही है। साथ ही संबंधित लोगों के बैंक खातों, संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसी को आशंका है कि इस कथित नेटवर्क के तार अन्य जिलों तक भी जुड़े हो सकते हैं। हालांकि मामले में अंतिम स्थिति जांच पूरी होने और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।