सूत्रों के मुताबिक, सीजेएम तृप्ति पाण्डेय वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए सुनवाई करेंगी।
कुख्यात अपराधी विकास दुबे की गिरफ्तारी के बाद लखनऊ के दो वकीलों को भी उज्जैन से पुलिस हिरासत में लिया गया है। ये दोनों वकील निजी गाड़ी से उज्जैन गए थे। पुलिस उनसे विकास दुबे से कनेक्शन की जांच कर रही है। आगे पढें- विकास दुबे की गिरफ्तारी के बाद हिरासत में लिए गए दो वकील, निजी गाड़ी से उज्जैन गए थे, पूछताछ जारी
विकास का साला राजू बहन सोनू के नाम पर खरीदी गई जमीनों को बेचने की फिराक में था। दुबे ने अपने दर्जनों गुर्गे राजू खुल्लर और सोनू को जिंदा या मुर्दा पकड़कर लाने के लिए लगा दिए थे।
कानपुर एनकाउंटर में गोरखपुर के रहने वाले दारोगा सुधाकर पांडे घायल हो गए थे। उन्होंने घटना के बारे में बताते हुए कहा था कि हमले के दौरान लगा कि मौत बिल्कुल सामने खड़ी है। सुधाकर पांडे ने बताया कि विकास दुबे की घर पर होने की सूचना मुखबिर द्वारा मिली, जिस पर क्षेत्राधिकारी स्तर की टीम जिसमें तीन थाने शामिल थे। रात के करीब एक बजे जब 40 पुलिसकर्मियों टीम दुबे के गांव पहुंची तो देखा कि रास्ते को जेसीबी लगाकर रोक दिया गया था।
एनकाउंटर में डीएसपी देवेंद्र मिश्र, शिवराजपुर एसओ महेश यादव समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। शुरुआती जांच में ही पता चला था कि थाने से दहशतगर्द विकास को सूचना दी गई थी कि दबिश पड़ने वाली है। इसलिए उसने पूरी तैयारी के साथ पुलिस पर हमला किया। एसएसपी ने इस प्रकरण की जांच एसपी ग्रामीण बृजेश कुमार श्रीवास्तव को दी थी।
चौबेपुर के बिकरू गांव में हुए एनकाउंटर में तत्कालीन चौबेपुर एसओ विनय तिवारी और हलका इंचार्ज दरोगा केके शर्मा की गद्दारी पर मुहर लग गई है। आठ पुलिसकर्मियों की मौत के जिम्मेदार यही हैं। आंखों से खूनी खेल देखने के बाद मौके से फरार हो गए थे। पुलिसकर्मियों की शहादत पर ये पुलिसकर्मी खुश हुए थे।
महाकाल मंदिर परिसर में 170 आधुनिक कैमरे लगे हुए हैं। इसके अलावा यहां हर समय 60 सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। गुरुवार सुबह जब मंदिर से विकास को गिरफ्तार किया गया, तब भी वहां भारी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात थे। हैरानी की बात यह है कि इस सब के बावजूद विकास दुबे मुंह पर मास्क लगाकर खुलेआम घूम रहा था। उसने मंदिर में फोटो भी खिंचवाए और किसी तो खबर तक नहीं लगी।
कुख्यात विकास दुबे को पकड़ने के लिए उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली, और मध्यप्रदेश में अलर्ट जारी किया गया था लेकिन विकास इतना शातिर है कि सात दिनों तक सात राज्यों की पुलिस को गुमराह करता रहा। विकास को पकड़ने के लिए कानपुर के चालीस थानों के पुलिसबल, दस हजार पुलिसकर्मी और यूपी एसटीएफ की सौ से अधिक टीमें, साथ ही प्रदेश का खुफिया विभाग उसकी तलाश करता रहा लेकिन इन सब को गच्चा देकर वो मध्यप्रदेश भाग निकला और फिर बड़ी आसानी से पुलिस की गिरफ्त में आ गया।
अपनी राजनीतिक पैठ बनाने के लिए विकास दुबे 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारी भी कर रहा था और उसने भाजपा और बसपा दोनों पार्टियों पर अपनी निगाह लगा रखी थी। करीबी सूत्रों के अनुसार वह रनिया से बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर इस बार चुनाव को लेकर पूरी तैयारी में था। कुछ दिनों पहले बदमाशों के हाथों मारे गए पिंटू सेंगर और विकास दुबे दोनों अगल-बगल की विधानसभा को लेकर बसपा से ही तैयारी में जुटे थे।
मध्यप्रदेश पुलिस ने कहा कि विकास दुबे उज्जैन में महाकाल मंदिर में वीआईपी पास लेकर दर्शन करने पहुंचा था। उसके दो अन्य साथी भी गिरफ्तार किए गए हैं।
लखनऊ नंबर की गाड़ी से महाकाल जी मंदिर पहुंचा था विकास दुबे। नंबर प्लेट पर हाईकोर्ट लिखा हुआ है। यह गाड़ी मनोज यादव के नाम पर रजिस्टर्ड है।
सात जुलाई की रात को विकास का फरीदाबाद में पहला सीसीटीवी फुटेज सामने आया था। जहां वो होटल में कमरा लेने गया था। इस दौरान विकास ने अपनी भाभी के यहां शरण ली। फरीदाबाद से गायब होने के बाद विकास 750 किमी दूर मध्यप्रदेश के उज्जैन में नजर आया। यहां उसने महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए पर्ची कटवाई फिर मंदिर प्रांगण में घूमता रहा।
उत्तर प्रदेश के कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या का आरोपी और कुख्यात अपराधी विकास दुबे को मध्यप्रदेश के उज्जैन से ट्रांजिट रिमांड पर यहां लाया जाएगा। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इसकी जानकारी दी। दुबे को आज मध्यप्रदेश पुलिस ने उज्जैन से गिरफ्तार किया है। अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने कहा कि दुबे को ट्रांजिट रिमांड पर उत्तर प्रदेश लाया जाएगा और कानपुर कांड में शामिल दुबे के गिरोह के सभी सदस्यों को पकड़ने तक हमारा अभियान जारी रहेगा।
विकास को पकड़ने के लिए कानपुर के चालीस थानों की फोर्स, सात हजार पुलिसकर्मी और यूपी एसटीएफ की सौ से अधिक टीमें उसकी तलाश करती रहीं लेकिन इन सब को गच्चा देकर वो मध्यप्रदेश भाग निकला और फिर बड़ी आसानी से पुलिस की गिरफ्त में आ गया। सबसे मजे की बात ये कि विकास कानपुर एनकाउंटर की घटना को अंजाम देने के बाद वो घटनास्थल से महज पांच किमी दूर शिवली गांव में दो दिन छिपा रहा और पुलिस पूरे प्रदेश में उसे ढूंढती रही।
कानपुर एनकाउंटर के बाद पुलिस के साथ हमीरपुर एनकाउंटर में मारे गए अमर दुबे की 29 जून को शादी बंदूक के दम पर दहशतगर्द विकास दुबे के किलेनुमा घर में हुई थी। आवारापन और दर्ज केसों की जानकारी के बाद युवती के घरवालों ने शादी से इंकार कर दिया था तो विकास ने दबाव डालकर शादी करवा दी।
विकास दुबे की तलाश में जुटी यूपी एसटीएफ बुधवार को दोबारा शहडोल जिले के बुढ़ार पहुंची और उसके साले ज्ञानेंद्र निगम उर्फ राजू उर्फ राजू खुल्लर को ले गई। एक दिन पहले यूपी एसटीएफ राजू के बेटे 20 वर्षीय आदर्श उर्फ महेंद्र निगम को भी अपने साथ ले गई थी।
गैंगस्टर विकास दुबे की गिरफ्तारी को लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि आरोपी का उज्जैन पहुंचना मिलीभगत की ओर इशारा करता है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'कानपुर के जघन्य हत्याकांड में यूपी सरकार को जिस मुस्तैदी से काम करना चाहिए था, वह पूरी तरह फेल साबित हुई। अलर्ट के बावजूद आरोपी का उज्जैन तक पहुंचना, न सिर्फ सुरक्षा के दावों की पोल खोलता है बल्कि मिलीभगत की ओर इशारा करता है। तीन महीने पुराने पत्र पर ‘नो एक्शन’ और कुख्यात अपराधियों की सूची में ‘विकास’ का नाम न होना बताता है कि इस मामले के तार दूर तक जुड़े हैं। यूपी सरकार को मामले की सीबीआई जांच करा सभी तथ्यों और प्रोटेक्शन के ताल्लुकातों को जगजाहिर करना चाहिए।'
विकास दुबे बेहद क्रूर हत्यारा रहा है। 1992 से 2020 तक जो भी उसके आड़े आया, विकास ने उसे मार दिया। हर हत्या क्रूरता की हदें पार करने वाली थी। विकास जिस स्कूल में पढ़ा था, उसके ही प्रिंसिपल की वीभत्स हत्या कर दी थी। बुजुर्ग सिद्धेश्वर पांडेय दुहाई देते रहे, लेकिन उसने एक न सुनी। हत्या के बाद उसने पांडेय का खून अपने हाथों पर भी मला था। पांडेय के बेटे राजेंद्र कहते हैं कि विकास ने उनके पिता को तड़पा-तड़पाकर मारा था।
संतोष शुक्ला के भाई मनोज ने कहा था, 'प्रशासनिक तंत्र ने विकास की मदद की। इसलिए अपराध की दुनिया का पौधा वटवृक्ष बन गया। मैं न्याय की गुहार लगता रहा, लेकिन तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियां विकास के पक्ष में थीं। मेरी कहीं सुनवाई नहीं हुई। कुछ मंत्री विकास की मदद कर रहे थे। विकास के पास एक लाल डायरी है। इसमें वह अपने खास अधिकारियों, नेताओं और उनसे जुड़े लोगों का हिसाब रखता है। अगर पुलिस को डायरी मिलती है तो काफी खुलासे हो सकते हैं।’
विकास का मकान चारों ओर से 20 फीट ऊंची और मोटी चहारदीवारी से घिरा हुआ था। दीवारों पर कंटीले तार भी थे। मकान में उसने बंकर बना रखा था, जबकि निगरानी के लिए उसने 50 सीसीटीवी कैमरे लगा रखे थे। प्रशासन की कार्रवाई से पहले घटनास्थल पर बाहरी लोगों के जाने पर पुलिस ने रोक लगा दी थी।
महाकाल मंदिर के पुजारी आशीष ने बताया कि पुलिस द्वारा एनकाउंटर में मारे जाने के डर से विकास दुबे आत्मसमर्पण करना चाहता था। मंदिर परिसर पहुंचने के बाद वो चिल्ला चिल्लाकर कहने लगा कि वह ही विकास दुबे है। उसने महाकाल मंदिर के सुरक्षाकर्मियों से कहा कि पुलिस को उसके बारे में सूचना दी जाए।
गैंगस्टर विकास दुबे की मां का कहना है कि हर साल मेरा बेटा उज्जैन मंदिर जाता था और श्रृंगार करवाता था। भोले बाबा ने मेरे बेटे की जान बचाई है। सरकार बेटे की जान बख्श दे।
दो जुलाई की रात पुलिस टीम पर हमले के बाद से पुलिस ने अब तक उसके गैंग के पांच लोगों को मार गिराया है, जबकि खाकी से गद्दारी करने वाले तीन पुलिसकर्मियों समेत कई अन्य पुलिस की गिरफ्त में हैं।
बुधवार को फरीदाबाद और एनसीआर में लोकेशन मिलने के बाद आखिर वह उज्जैन कैसे पहुंचा यह बड़ा सवाल है। हालांकि अब उज्जैन पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। यूपी पुलिस के पहुंचते ही उसकी ट्रांजिट रिमांड की कार्रवाई की जाएगी। उम्मीद है थोड़ी देर में ही उज्जैन पुलिस इसका खुलासा करेगी कि वह यहां कैसे पहुंचा।
गुरुवार सुबह लगभग नौ बजे विकास दुबे वीआईपी दर्शन के टिकट काउंटर पर पहुंचा। वहां उसने वीआईपी दर्शन के लिए 250 रुपए की पर्ची कटवाई। उसने जानबूझकर पर्ची पर अपना सही नाम विकास दुबे लिखवाया और मोबाइल नंबर भी दिया।
महाकाल मंदिर में लखन यादव नाम के गार्ड ने गैंगस्टर विकास दुबे को पहचाना और उसे पुलिस को सौंप दिया।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेख यादव ने विकास दुबे की गिरफ्तारी को लेकर कहा, 'खबर आ रही है कि ‘कानपुर-कांड’ का मुख्य अपराधी पुलिस की हिरासत में है। अगर ये सच है तो सरकार साफ करे कि ये आत्मसमर्पण है या गिरफ्तारी। साथ ही उसके मोबाइल की सीडीआर सार्वजनिक करे जिससे सच्ची मिलीभगत का भंडाफोड़ हो सके।'
गैंगस्टर की गिरफ्तारी पर गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का कहना है कि मध्यप्रदेश पुलिस को इंटेलिजेंस से कुख्यात अपराधी विकास दुबे के उज्जैन आने की सूचना मिली थी। इसी आधार पर महाकाल थाना पुलिस ने विकास की गिरफ्तारी की है।