फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

MP News: दमोह जिला अस्पताल में अनोखा प्रयोग, मां की तरह अब पिता कंगारू मदर बनकर कर रहे नवजात शिशु की देखभाल

Mon, 22 May 2023 04:59 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह

सार

दमोह के जिला अस्पताल में कंगारू मदर केयर में अब पिताओं की भागीदारी बढ़ाई जा रही है, जो कि अनूठी पहल है। इससे नवजात शिशु को तो लाभ मिल ही रहा है, वहीं पिता भी अब इससे अपने आपको भावनात्मक रूप से नवजात से ज्यादा जुड़ा पा रहे हैं। 
विज्ञापन
दमोह के जिला अस्पताल में नवजात बच्चों के पिता कंगारू मदर बनकर उनकी देखभाल कर रहे हैं। - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दमोह जिला अस्पताल में अनोखा प्रयोग किया गया है। यहां जन्म लेने वाले नवजात बच्चों के पिता कंगारू मदर बनकर अपने नवजात शिशु की मां की तरह देखभाल कर रहे हैं। 
विज्ञापन


दमोह के जिला अस्पताल में मां के साथ पिता की भूमिका भी भर्ती नवजात के पालन पोषण में बढ़ाई जा रही है। इस तरह का यह नया प्रयोग है। सिविल सर्जन एवं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश नामदेव ने बताया नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई प्रभारी डॉ. सोनू शर्मा की देखरेख में इसे शुरू करवाया है। हाईपोथर्मिया से बचाव, भावनात्मक जुड़ाव, शिशु के मस्तिष्क पर पॉजिटिव प्रभाव, इन्फेक्शन के प्रभाव कम होना, अस्पताल से जल्दी छुट्टी में मदद, शिशु को अधिक एव निश्चिंत नींद का लाभ, शिशु जितना ज्यादा सोता है, उतना जल्दी वजन बढ़ता है।

 
विज्ञापन

नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई प्रभारी डॉ. सोनू शर्मा की देखरेख में इसे शुरू करवाया है। - फोटो : सोशल मीडिया
आरएमओ डॉ. विशाल शुक्ला ने बताया कंगारू मदर केयर में अब पिताओं की भागीदारी बढ़ाई जा रही है, जो कि अनूठी पहल है। पिता भी अब इससे अपने आपको भावनात्मक रूप से नवजात से ज्यादा जुड़ा पा रहे हैं। कुछ पिताओं ने अपने शिशुओं की सुरक्षा के लिए नशा आदि छोड़ने का मन भी बना लिया है। डॉ. सोनू शर्मा ने बताया कि इस प्रक्रिया से बच्चे का वजन बढ़ेगा, उसका मानसिक विकास भी होगा।

क्या है कंगारू मदर केयर
कंगारू मदर केयर यानी अपनी छाती से बच्चे के नग्न शरीर को चिपकाकर त्वचा के त्वचा से संपर्क द्वारा बच्चे को गर्म रखने की प्रक्रिया है। जिससे कम समय में जन्मे या कम वजन के बच्चे जिन्हें हाईपोथर्मिया का खतरा रहता है, उन्हें हाईपोथर्मिया से बचाया जा सकता है। यह वैज्ञानिक तरीके से सम्मत विधि है, जिसे अब तक नवजात की मां या मौसी या दादी ही करवाती थी, जबकि यह प्रक्रिया स्त्री अथवा पुरुष कोई भी करा सकता है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें