उमरिया जिले के पाली वन परिक्षेत्र के खालौंद जंगल और उसके आसपास जंगली जानवरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। जंगल से सटे इलाकों में बाघों की बढ़ती संख्या और उनकी मानव बस्तियों में घुसपैठ से ग्रामीणों में भय का माहौल है। बीते तीन वर्षों से जंगली जानवरों द्वारा मानव पर हमले की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
पाली के ग्राम खालौंद में जंगल के पास लकड़ी बीनने गए आदिवासी युवक रामलाल बैगा (पिता सताई बैगा) पर बाघ ने अचानक हमला कर दिया। घटना उस समय हुई जब युवक जंगल के नजदीक झाड़ियों में लकड़ी बीन रहा था। झाड़ियों में छिपे बाघ ने रामलाल पर हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
घायल युवक को तुरंत पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर उसे उमरिया जिला अस्पताल रेफर किया गया। पाली रेंजर सचिन कांत ने जानकारी दी कि घटना जंगल के पास राजस्व क्षेत्र में हुई। उन्होंने बताया कि घायल युवक की स्थिति अब सामान्य है और उसका इलाज किया जा रहा है।
ग्रामीणों में भय का माहौल
बाघों की बढ़ती संख्या के कारण वे अब जंगल से निकलकर रिहायशी इलाकों में आ रहे हैं। इससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने बताया कि दिन ढलने के बाद घर से बाहर निकलना अब जोखिम भरा हो गया है, क्योंकि कभी भी बाघ के हमले का खतरा बना रहता है। इस घटना ने वन विभाग और प्रशासन के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। बाघों की संख्या और मानव संघर्ष को देखते हुए उचित कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
घायल राम लाल बैगा