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विक्रमोत्सव: भारत छोड़ो आंदोलन के पहले हो चुकी थी इस उत्सव की शुरुआत, 114 रियासतों के राजा होते थे शामिल

Wed, 26 Feb 2025 04:52 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

पंडित सूर्यनारायण व्यास 114 रियासतों के राज ज्योतिषी थे, उन्होंने वर्ष 1940 में मासिक पत्रिका विक्रम का प्रकाशन किया था। इसके दो वर्षों के बाद विक्रम महोत्सव की शुरुआत 114 रियासतों के राजा महाराजाओं के माध्यम से हुई थी। उज्जैन से शुरू हुए इस आयोजन की शुरुआत में ही लोकप्रियता इतनी थी कि उज्जैन से लेकर मुंबई तक इस उत्सव को न सिर्फ राजा महाराजाओं ने स्वीकार किया बल्कि इस उत्सव को धूमधाम से मनाया जाने लगा।
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विक्रम महोत्सव की शुरुआत 114 रियासतों के राजा महाराजाओं के माध्यम से हुई थी। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारतीय समाज को अपने महानायक को और उनके गौरवशाली इतिहास से परिचित करवाने के उद्देश्य से वर्ष 1942 में विक्रमोत्सव गई थी। यह उस समय का एक ऐसा आयोजन था, जिनकी धूम उज्जैन से लेकर मुंबई तक सुनाई और दिखाई देती थी। इस उत्सव की शुरुआत में ही 114 रियासतों के राजा महाराजा एकत्रित हुए थे, जिन्होंने इस उत्सव को धूमधाम से मनाना शुरू कर दिया था।

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पंडित सूर्यनारायण व्यास 114 रियासतों के राज ज्योतिषी थे, उन्होंने वर्ष 1940 में मासिक पत्रिका विक्रम का प्रकाशन किया था। इसके दो वर्षों के बाद विक्रम महोत्सव की शुरुआत 114 रियासतों के राजा महाराजाओं के माध्यम से हुई थी। उज्जैन से शुरू हुए इस आयोजन की शुरुआत में ही लोकप्रियता इतनी थी कि उज्जैन से लेकर मुंबई तक इस उत्सव को न सिर्फ राजा महाराजाओं ने स्वीकार किया बल्कि इस उत्सव को धूमधाम से मनाया जाने लगा। इसके साथ ही सुपरस्टार पृथ्वीराज कपूर को हीरो लेकर पंडित सूर्यनारायण व्यास ने विक्रमादित्य फिल्म का निर्माण किया था, इस फिल्म से दो बड़े फायदे हुए एक तो पूरे देश भर में लोगों को राजा विक्रमादित्य इतिहास की जानकारी लगी वहीं दूसरी और प्रतिवर्ष मनाए जाने वाले विक्रमोत्सव से भी इस फिल्म के बाद जुड़ने वाले लोगों की संख्या में काफी इजाफा हुआ था। इसके साथ ही पंडित व्यास ने राजा विक्रमादित्य के नाम को और भी विख्यात करने के लिए विक्रम द्वि शास्त्राब्दी महोत्सव की शुरुआत भी की थी।

राजा विक्रमादित्य को काल्पनिक बताते थे अंग्रेज
भारत छोड़ो आंदोलन के पहले शुरू हुए विक्रमोत्सव के आयोजन में हिंदू राजा महाराजाओं के एकत्रीकरण होने से यह आयोजन शुरुआत से ही अंग्रेजों को खटकता था। इस आयोजन में हिंदू राजाओं के एकत्रीकरण होने से मुस्लिम राजाओं और अंग्रेजों को काफी परेशानी थी। यही कारण है कि लॉर्ड वेवल ने उन्हें भड़काया, जिसके कारण कई राजाओं ने अपने हाथ विक्रम महोत्सव से खींच लिए थे। राजा विक्रमादित्य को काल्पनिक बताने के लिए अंग्रेजों ने काफी प्रयास किए थे, लेकिन उत्सव के दौरान ही हिंदी, मराठी और अंग्रेजी में विक्रम स्मृति ग्रंथ का प्रकाशन हुआ। लगभग 2000 पेज के इस ग्रंथ में दुनिया भर के विद्वानों से विक्रम व कालिदास पर शोध पूर्ण प्रमाणिक लेख लिखवाए गए थे, जिसके माध्यम से इस भ्रम को तोड़ा गया कि यह एक उपाधि नहीं बल्कि इतिहास में राजा विक्रमादित्य हुए हैं और उन्होंने उज्जैन पर शासन किया है।
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इस वर्ष 125 दिन तक मनाया जाएगा यह उत्सव
वर्तमान में यह उत्सव पर्व की तरह ही लोकप्रिय और गौरवशाली होता जा रहा है, क्योंकि वर्तमान में इस उत्सव को 5 या 10 दिन नहीं बल्कि पूरे 125 दिन तक बनाए जाने की शुरुआत महाशिवरात्रि 26 फरवरी से हो चुकी है। यह उत्सव आगामी 30 जून 2025 तक सतत जारी रहेगा, जिसके अंतर्गत अनादी देव, शिव की कलाओं का शिवार्चन, विक्रम व्यापार मेला, आदि शिल्प वस्त्र उद्योग, हथकरघा उपकरणों की प्रदर्शनी, विक्रमादित्य वैदिक घड़ी एप्प का लोकार्पण, आदि अनादि पर्व, उज्जैनी नाटक एवं नृत्य समारोह, शोध संगोष्ठी, विक्रमादित्य का न्याय वैचारिक समागम के साथ ही अन्य कई आयोजन होंगे जो कि इस वर्ष उज्जैन से लेकर इंदौर, भोपाल और दिल्ली तक आयोजित किए जाएंगे।

 

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