मैथिली ठाकुर और राहुल देशपांडे
- फोटो : अमर उजाला
उज्जैन में संपन्न होने वाले 66वें अखिल भारतीय कालिदास समारोह 2024 की रूपरेखा लगभग तय हो गई है। इस साल लंबे अंतराल के बाद भारत के उप राष्ट्रपति, रामजन्मभूमि न्यास के कोषाध्यक्ष आचार्य गोविंददेव गिरी के शुभारंभ अवसर पर तथा श्री महंत डॉ. आचार्य सीयारामदास महाराज माउंटआबू के समापन अवसर पर उपस्थित होने की संभावना है। पूर्वरंग के अंतर्गत वागर्चन गढ़कालिका मंदिर पर संपन्न होगा। इस बार 101 छात्र-छात्राओं द्वारा श्यामलादण्डकम का सामूहिक पाठ तथा संस्कृत के विद्वानों, गणमान्य नागरीकों, कलाकारों की उपस्थिति में महाकवि कालिदास की आराध्या का पूजन किया जाएगा।
कालिदास संस्कृत अकादमी के निदेशक डॉ. गोविंद गंधे ने जानकारी देते हुए बताया कि कलश यात्रा में उज्जैन शहर के प्रतिष्ठित गणमान्य नागरिक, लोकनर्तकों के दल एवं पोलैंड के लोकनृत्य के दल के साथ अन्य प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुसार अन्य सभी का निर्वहन होगा। नान्दी कार्यक्रम के अंतर्गत मैथिली ठाकुर भक्ति एवं सुगम संगीत का कार्यक्रम होगा। शंख वादकों का दल, भक्ति संगीत एवं देश भक्ति गीत प्रस्तुत करेंगे। पारंपरिक मंगल वादय 'सनई' वादकों के द्वारा सुमधुर प्रस्तुतियां की जाएंगी।
इस साल समारोह में कालिदास समारोह पर केंद्नित कालिदासमहोत्साहम का मंचन किया जाएगा। प्रसिद्ध कथक नृत्यागना राजश्री शिर्के की मेघदूतम पर आधारित रंगनृत्य की प्रस्तुति होगी। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल के नाट्य अनुसंधान केन्द्र द्वारा 'मृच्छकटिकम' पर आधारित 'वसंत सेना' नाटक की प्रस्तुति की जाएगी। हैदराबाद की के श्रीवल्ली अपनी गुरु रश्मि मेनन के साथ मोहिनीअट्टम एवं मणिपुरी नृत्य प्रस्तुत करेंगी। सुप्रद्धित शास्त्रीय संगीत गायक राहुल देशपांडे शास्त्रीय गायन प्रस्तुत करेंगे। अश्विन दलवी के द्वारा 'सुरबहार' वाद्ययंत्र का वादन किया जाएगा। अनुराधा सिंह, भोपाल घुघरु वादन करेंगी।
दिल्ली की नृत्यागना आरोही आठवले कथक नृत्य की प्रस्तुति करेंगी। सारस्वत आयोजन के अंतर्गत राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी तीन सत्रों में होगी। इस वर्ष शोध संगोष्ठी का विषय महाकवि कालिदास के साहित्य में पंचमहाभूतविर्मश रखा गया है। व्याख्यान माला के अंतर्गत प्रो. मुरली मनोहर पाठक, कुलपति, लालबहादुर शास्त्री संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली, प्रो. रमाकांत पांडेय, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भोपाल तथा प्रो. रवीन्द्र मूल्ये, पुणे का व्याख्यान होगा। इस साल देश के लगभग 20 प्रदेशों के संस्कृत के महाकवि संस्कृत कवि सम्मेलन में अपनी रचनाओं का पाठ करेंगे। सारस्वत आयोजन में मलेशिया के इडन खू, पोलैण्ड के फिलिप्स रोचेन्सकी, नेपाल की प्रियमवदा काफले, काशीनाथ नैपुण्ये, सविना देवी प्रो. वासुदेव काफ्ले के उपस्थित रहने की पूरी संभावना है।