सुख, सौभाग्य और समृद्धि की कामना को लेकर शीतला माता मंदिरों में रविवार की आधी रात से ही महिलाओं की भीड़ उमड़ने लगी। सुबह तो अधिकांश मंदिरों में महिलाओं की लंबी कतारें नजर आई। सुबह चार बजे से ही महिलाएं नहाकर दर्शन करने पहुंच गई थी और लाइन में लग गई थी।
चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर एक अप्रैल को शीतला सप्तमी का पर्व मनाया जा रहा है। सप्तमी पर शीतला माता के पूजन का विधान है। यह पूजन करने से मान्यता है कि महिलाओं के घर और परिवार में सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है और इसके साथ ही यह भी मान्यता है कि शीतला माता पूरे वर्ष परिवार में ज्वर तथा संक्रमित जनित बीमारियों से रक्षा करती है।
शीतला स्त्रोत में बताया गया है कि विधि-विधान से पूजन करने पर माता प्रसन्न होती है। पूजन में एक दिन पहले बनाए हुए व्यंजनों का माता को भोग लगाया जाता है और उनके समक्ष धूप और अगरबत्ती बगैर जलाए अर्पित किए जाते हैं। इधर, आधी रात के बाद से ही शहर के विभिन्न शीतला माता मंदिरों पर महिलाओं द्वारा देवी का पूजन प्रारंभ कर दिया गया था।
अंकपात मार्ग स्थित शीतला माता मंदिर हो या फिर कुशलपुरा स्थित शीतला माता मंदिर में सुबह महिलाओं की लंबी कतारें नजर आ रही थी। पंडित अमर डिब्बावाला ने बताया कि आज सप्तमी का पर्व रवि योग में मन रहा है और इसका विशेष फल पूजन करने वाली महिलाओं को मिलेगा। कल शाम से ही घरों में शीतला माता पूजन के लिए भोजन बनाने का काम शुरू हो गया था और आज घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता है और एक दिन पहले तैयार किया गया भोजन ही परिवार के लोग करेंगे।