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Ujjain: विक्रम विवि में बदलेंगे मुहावरे, न तो पढ़ाया जाएगा जो जीता वही सिकंदर और न मजबूरी का नाम महात्मा गांधी

Fri, 21 Apr 2023 04:07 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

वर्तमान में हमने जो जीता वही सिकंदर मुहावरे को बदलकर इसे जो जीता वही सम्राट विक्रमादित्य कर दिया है। जिसे जल्द ही विक्रम विश्वविद्यालय में जो जीता वही सम्राट विक्रमादित्य के रूप में ही पढ़ाया जाएगा। 
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विक्रम विश्वविद्यालय (फाइल फोटो) - फोटो : vikramuniv.ac.in
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विस्तार
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पिछले कुछ समय से एक खबर काफी सुर्खियों में बनी हुई है, जिसमें कहीं शहरों के नाम बदले जा रहे हैं तो कहीं रेलवे स्टेशन के नाम बदलकर उन्हें महापुरुषों के नाम से सुसज्जित किया जा रहा है। इसी कड़ी में विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति अखिलेश कुमार पांडे ने भी अब विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा देने की पहल की है, जिसमें सबसे पहले कुछ मुहावरों को बदला जाएगा। उनका कहना है कि हमें विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा देना चाहिए जो कि उनके लिए प्रेरणादायी साबित हो ना कि उन्हें इस बात का एहसास कराए कि वह गुलामी की मानसिकता में जकड़े हुए है। 
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विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति अखिलेश कुमार पांडे ने बताया कि वैसे तो कार्यपरिषद की बैठक में इस बात पर निर्णय हो चुका है और हमने विक्रम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर को भी यह आदेशित कर दिया है कि वे हमें ऐसे मुहावरों की जानकारी दें, जिनके कुछ शब्द हटाने से ये मुहावरे हमें गौरवान्वित करें और पढ़ने सुनने में भी ठीक लगे। पांडे ने बताया कि वर्तमान में हमने जो जीता वही सिकंदर मुहावरे को बदलकर इसे जो जीता वही सम्राट विक्रमादित्य कर दिया है। जिसे जल्द ही विक्रम विश्वविद्यालय में जो जीता वही सम्राट विक्रमादित्य के रूप में ही पढ़ाया जाएगा। 

विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति अखिलेश कुमार पांडे बताते हैं कि इस मुहावरे के साथ ही मजबूरी का नाम महात्मा गांधी को भी बदला जाएगा, क्योंकि इन शब्दों का कोई मेल नहीं है कि मजबूरी का नाम महात्मा गांधी क्यों है। यह गलत शब्द है। इसके साथ ही कहां राजा भोज कहां गंगू तेली जैसे मुहावरे को भी बदलने की तैयारी है क्योंकि राजा भोज का इतिहास काफी भव्य और दिव्य है लेकिन उसकी तुलना गंगू तेली से करना गलत है। आपने यह भी बताया कि पूर्व में इस मुहावरे को कहां राजा भोज और कहां तेलंग कहा जाता था, लेकिन पता नहीं कैसे इसमें बदलाव हुआ और यह कहां राजा भोज कहां गंगू तेली के नाम से प्रसिद्ध हो गया। विक्रम विश्वविद्यालय में डॉ. उमेश सिंह और डॉ. शैलेंद्र शर्मा ऐसे सभी मुहावरों की खोज कर रहे हैं जिन्हें बदला जा सके। 
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मुहावरों को बदलकर पढ़ाने की तैयारियां शुरू 
इस पूरे मामले को लेकर अभी विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति अखिलेश कुमार पांडे ने भले ही लिखित में कोई आदेश जारी न किया हो, लेकिन कार्यपरिषद की बैठक में दिए गए मौखिक निर्देश के बाद विक्रम विश्वविद्यालय में इस मुहावरे को बदल कर पढ़ाने की तैयारियां शुरू हो चुकी है। जल्द ही विक्रम विश्वविद्यालय के कोर्स कंटेंट, तमाम फंक्शंस, सोशल मीडिया पर, कुलपति सम्मेलन, शिक्षाविदों की बैठक, युवा पंचायत आदि सभी स्थानों पर इसे प्रचारित किया जाएगा।
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