सिंहस्थ 2028 को लेकर शुरू हुई साधु-संतों की चिंता
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री एवं श्रीपंच दशनाम जूना अखाड़ा के मुख्य संरक्षक श्री महंत हरीगिरी महाराज ने जानकारी देते हुए बताया, 28 मई 2023 से बैठकों का दौर शुरू होगा। जो कि 30 मई 2023 तक जारी रहेगा। इन बैठकों में सिंहस्थ के प्रत्येक बिंदु पर विचार विमर्श किए जाने के साथ ही मां शिप्रा को प्रवाहमान किए जाने विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आम श्रद्धालु को भी सहजता से दर्शन के साथ ही सिंहस्थ 2028 निर्विघ्न संपन्न होने पर परिचर्चा भी होगी।
30 मई 2023 को प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी नीलगंगा सरोवर पर गंगा दशहरा उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा, जिसमें देश भर के साधु-संत शाही स्नान करेंगे और शोभायात्रा भी निकाली जाएगी, जिसके लिए सभी अखाड़ों के साथ ही गणमान्यजनों को आमंत्रित किया गया है।
'मैं निराशावादी नहीं हर मांगे मनवाकर रहूंगा'
पत्रकारवार्ता के दौरान जब अखाड़ा परिषद महामंत्री हरिगिरि महाराज से पूछा गया कि सरकार मां शिप्रा को प्रवाहमान करने के नाम पर करोड़ों रुपयों की योजनाएं हर सिंहस्थ के पहले लाती है, लेकिन इससे न तो मां शिप्रा प्रवाहमान होती है न ही इसका जल शुद्ध हो पाता है। स्थिति यह है कि आज भी मां शिप्रा मे कई नालों का पानी खुले रूप से मिल रहा है, जिसकी जानकारी प्रशासन को भी है। लेकिन फिर भी इस पर कोई रोक नहीं लगाई जाती है। इस प्रश्न के जवाब में हरिगिरि महाराज ने कहा कि पहले के सिंहस्थ में भी मैंने ऐसे स्थानों पर पहुंचकर नालों का गंदा पानी मां शिप्रा में मिलने से रुकवाया था। अब भी मैं ऐसा ही करूंगा। जूना अखाड़ा द्वारा शिप्रा के जल का सैंपल लेकर इसकी जांच करवाई जाएगी कि आखिर यह जल आचमन करने के योग्य भी है या नहीं? जब उनसे पूछा गया कि रिपोर्ट में जल प्रदूषित मिलता है और फिर भी सरकार आपकी बात नहीं मानती है तो उनका जवाब था कि मैं निराशावादी नहीं हूं, अपनी हर मांगे मनवाना जानता हूं, मैं किसी से नहीं डरता मेरा हौसला बुलंद है।
'बाबा महाकाल हम सभी के हैं'
अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरिगिरि महाराज ने बताया कि महाकाल मंदिर में इन दिनों दर्शन के नाम पर व्यवसाय किया जा रहा है। रुपये लेकर भक्तों को भगवान के दर्शन करने की टिकट निर्धारित कर दी गई है, जिससे आम आदमी बाबा महाकाल के दर्शन-पूजन से दूर हो गया है। बाबा महाकाल हम सभी के हैं, इनका पूजन-अर्चन और दर्शन करने का अधिकार हम सभी का है। इस बैठक में इस विषय पर भी मंथन चिंतन किया जाएगा।
शिप्रा पर बना दो विशाल डैम...
मां शिप्रा को सदा प्रवाहमान बनाए रखने के लिए अखाड़ा परिषद महामंत्री हरिगिरि महाराज ने एक उपाय सुझाया किया कि रामघाट के पहले के क्षेत्र में 10 से 15 किलोमीटर तक एक डैम का निर्माण कर देना चाहिए, जिससे कि शिप्रा तट पर सदैव जल प्रवाहित होने के साथ ही मां शिप्रा सदैव साफ व स्वच्छ रहेगी। डैम के बनने से मां शिप्रा के प्रवाहमान और साफ व स्वच्छ होने के साथ ही क्षेत्र के किसानों को भी डैम में पानी होने से इसका लाभ मिलेगा।