उज्जैन के घोंसला गांव में मध्यप्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा पशुओं का बाजार लगता है। सोमवार को लगने वाले इस पशु हाट में हजारों पशुओं की खरीदी बिक्री होती है। इसकी खास बात यह है कि यहां लाखों के सौदे होते हैं, लेकिन किसी को पता नहीं चलता कि आखिर पशु का भाव कितना लगा है।
यहां पर बिना कुछ बोले मोल-भाव हाथों की उंगलियों के इशारों से होता है। हाथों को भी गमछे से ढककर रखते हैं। गमछे के नीचे उंगलियों को पकड़कर पशु की बिक्री की रकम तय हो जाती है। यदि किसी पशु के भाव बताने की भी नौबत आई तो 100 रुपये से लेकर 25 हजार रुपये के अलग-अलग कोड वर्ड हैं। यदि किसी को सौ रुपये कहना है तो वह सिकारा कहेगा। 15 हजार के लिए मुन्नी का इस्तेमाल होता है।
हाट की खास बात यह है कि पशुओं का सौदा गमछे की आड़ में हाथों के इशारों से होता है। जरूरी होने पर अगर कीमत बताना भी हो तो वह रुपये का मोल सिकारा, लट्ठा और असर जैसे शब्दों में बोलकर होता है। यहां पर रुपयों की गणना के लिए इन्हीं प्रचलित शब्दों का उपयोग किया जाता है।
पशु हाट में आसपास के क्षेत्रों सहित अलग-अलग जिलों के पशु खरीदार आते हैं। अलग-अलग किस्म की भैंस के लिए प्रसिद्ध है। पशु हाट में सालों से इसी तरह से सौदे होते आए हैं। अगर किसी को पशु खरीदना है, तो उसे दलाल की मदद लेना पड़ता है। यहां पशुओं का सौदा करवाने वाले कई दलाल मिल जाएंगे। प्रत्येक सोमवार को लगने वाले इस हाट बाजार में भैंस, बकरी जैसे दुधारू पशुओं के साथ बैल जैसे कृषि उपयोगी पशुओं के सौदे होते हैं। अधिकांशतः दुधारू भैंस का बड़ा व्यापार होता है। घोंसला का पशु हाट भैंस की खरीदी-बिक्री के लिए मशहूर है। पशुओं की शारीरिक बनावट देखकर ही व्यापारी कीमत का अंदाजा लगा लेते हैं। पशु पसंद आने के बाद उंगलियों के इशारों में सौदा तय होता है।
एक उंगली का मतलब 10 हजार...
भैंस व्यापारी और दलाल हाथों पर कपड़ा डालकर एक दूसरे की उंगलियां पकड़ते हैं। इसमें पशु की कद काठी को देखकर उसकी कीमत का अंदाजा पहले ही लगा लिया जाता है। इसके बाद शुरू होता है सौदा। मवेशी को देखकर आकलन अनुसार यदि भैंस की अनुमानित कीमत 50 हजार रुपये है तो ऐसे में एक अंगुली का मतलब 10 हजार रुपये तय रहता है। इस हिसाब से और पांच उंगली पकड़ने पर 50 हजार होगा। यदि सामने वाला भैंस को 40 हजार में लेने का इच्छुक है, तो वह चार उंगली पकड़ेगा। सौदा तय हुआ तो दोनों हाथ पकड़कर दबा दिया जाता है। इसका मतलब डील डन। अगर, कीमत 55 हजार है तो पांचों उंगलियां पकड़कर पक्का बोला जाता है।
इसके बाद एक बार और पांचों उंगलियां पकड़कर कच्चा बोला जाता है। इस तरह सौदा 55 हजार में तय होता है। कुल मिलाकर पहली बार में प्रति उंगली की गणना 10 हजार में की जाती है। ये पक्की बोली होती है। इसी तरह दूसरी बार प्रति उंगली की कीमत एक हजार होती है, यह कच्ची बोली होती है। अब अगर कीमत 27 हजार है, तो दो उंगलियों को पकड़कर पक्का बोलते हैं। इसके बाद सात उंगलियों को पकड़कर कच्चा बोलते हैं। इस तरह कीमत 27 हजार होगी। इसके बाद भी कीमत में कुछ और उतार-चढ़ाव करना हो, तो फिर इनकी भाषा में कीमत तय होती है। दलाल सौदे के हिसाब से अपना कमीशन ले लेते हैं। इनका कोई कमीशन फिक्स नहीं होता है।
उंगलियां पशुओं की कीमत तय करती हैं...
भैंस व्यापारी प्रकाश शर्मा घोंसला और सुरेंद्र सिंह चरुड़ी ने बताया कि इस सौदे में दो व्यापारी या दलाल हाथों पर गमछा डाल कर एक-दूसरे की उंगलियों को पकड़ते और छोड़ते हैं। यही उंगलियां पशुओं की कीमत तय करती हैं। मवेशी को देखकर लगता है कि वह एक लाख रुपये कीमत रखती है, तो सौदे में केवल एक उंगली ही काफी होती है। वहीं, हाट में होने वाले सौदे पशुओं की क्वॉलिटी पर निर्भर होते हैं। यहां हुए सौदों में इतनी पारदर्शिता और विश्वसनीयता होती है कि गमछे की आड़ में तय हुए सौदे पर कभी किसी पक्ष ने सवाल नहीं उठाए। हाथों की सभी 10 उंगलियों की अपनी एक कीमत होती है, जिस पर पूरा हाट बाजार संचालित होता है।