सार
Ujjain News: नगर की सुख-समृद्धि, रक्षा और मंगल कामना की दृष्टि से प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी को नगर पूजा की जाती है। कलेक्टर कुमार पुरूषोत्तम ने चौबीस खंबा माता मंदिर में पूजा की और देवी को मदिरा का भोग लगाया।
24 खंबा मंदिर में देवी की पूजा करते कलेक्टर
- फोटो : अमर उजाला
शारदीय नवरात्रि की महाष्टमी पर आज सुबह नगर व जिले की सुख समृद्धि के लिए कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने 24 खंबा माता महालाया और महामाया का विशेष पूजन अर्चन कर नगर पूजा की। सुबह 8 बजे महालाया और महामाया देवी का पूजन कर नगर पूजा की शुरुआत हुई। शासकीय पूजन के बाद ढोल-ढमाकों व ध्वज के साथ अधिकारी, कर्मचारियों का दल पैदल नगर के अन्य माता मंदिर और भैरव मंदिरों में पूजा के लिए पहुँचा।
नगर व जिले की सुख-समृद्धि, रक्षा और मंगल कामना की दृष्टि से प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी को नगर पूजा की जाती है। आज सुबह 8 बजे कलेक्टर कुमार पुरूषोत्तम ने चौबीस खंबा माता मंदिर पर पूजन कर उन्हें मदिरा का भोग लगाया। इसके बाद कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम कुछ देर हांडी लेकर यात्रा के आगे आगे चले इसके बाद अधिकारियों, कर्मचारियों और कोटवारों का दल 27 किलोमीटर लंबी नगर पूजा की यात्रा पर निकला। ढोल और ध्वज के साथ यह यात्रा आज नगर के लगभग 40 से अधिक मंदिरों तक पहुंचेगी जहां भगवान का विशेष पूजन अर्चन किया जाएगा। इस यात्रा की विशेषता है कि यात्रा के आगे आगे हांडी से मदिरा की धार नगर परिक्रमा के दौरान बहती रहेगी। यह यात्रा कालभैरव, भूखी माता, चामुंडा माता, गढ़कालिका सहित नगर के 40 मंदिरों में पूजा की जाएगी। साथ में अन्य सदस्य भजिए, पूड़ी, बड़बाकुल का भोग लेकर भगवान को अर्पित करेंगे और माता को सोलह श्रृंगार की सामग्री और चुनरी अर्पित की जाएगी।
दिनभर पूजन का दौर चलने के बाद रात करीब 8 बजे गढ़कालिका होकर अंकपात मार्ग स्थित हांडी फोड़ भैरव मंदिर पर नगर पूजा का समापन होगा। पौराणिक मान्यता है कि शारदीय नवरात्र की महाअष्टमी पर नगर पूजा की परंपरा सम्राट विक्रमादित्य द्वारा अपने राज्य व नगर में खुशहाली व सुख समृद्धि के लिए महाअष्टमी पर नगर पूजा की शुरूआत की थी। जिसका निर्वहन आज भी किया जा रहा है।
मेरा सौभाग्य की मुझे इस पूजा का अवसर मिला - कलेक्टर
नगर पूजा के दौरान कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम माता की भक्ति में लीन दिखाई दिए। इस दौरान उन्होंने परंपरागत रूप से माता का पूजन अर्चन कर उन्हे मदिरा का भोग लगाया और पुजारी द्वारा उड़ाई गई चुनरी को भी ओड़े रखा। पूजन अर्चन के बाद कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने मीडिया से कहा कि यह सांस्कृतिक परंपरा आदिकाल से चली आ रही है, मेरा सौभाग्य है कि कलेक्टर होने के नाते मुझे इसका अवसर मिला मेरी एक ही कामना है कि शहर जिले में समृद्धि हो। बाबा महाकाल और माता हरसिद्धि का आशीर्वाद सब पर बना रहे। भारत के चक्रवर्ती सम्राट राजा विक्रमादित्य ने जनकल्याण के लिए इस पूजा की शुरुआत की थी। यह हमारी परंपरा है जिसमें नगर पूजा के दौरान माता को मदिरा का भोग लगाया जाता है, जिसका निर्वहन किया जा रहा है। परंपराओं का निर्वहन करने वाली ऐसी यात्राएं मन को अच्छी लगती हैं यह यात्रा इसलिए भी काफी अच्छी है क्योंकि इसमें ग्राम के कोटवार से लेकर कलेक्टर तक शामिल होते हैं।