आज नगर भ्रमण पर निकलेंगे काल भैरव
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काल भैरव मंदिर की पहचान भगवान महाकाल के नगर कोतवाल के रूप में है। भगवान महाकाल की तरह नगर कोतवाल काल भैरव भी भ्रमण कर प्रजा का हाल-चाल जानने के लिए निकलते हैं। नगर कोतवाल के रूप में विराजित काल भैरव की महिमा अपरंपार है। मान्यता है कि भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेने से पहले नगर कोतवाल का आशीर्वाद लेना जरूरी है। श्रद्धालु भगवान महाकाल का दर्शन करने के बाद कालभैरव के दरबार में पहुंचते हैं।
पुजारी पंडित सदाशिव चतुर्वेदी बताते हैं कि काल भैरव मंदिर में तामसी पूजा समेत तीन प्रकार की पूजा होती है। उन्होंने बताया कि भगवान काल भैरव की सवारी वर्ष में दो बार नगर भ्रमण पर निकलती है। हर साल डोलग्यारस और भैरव अष्टमी पर्व पर ग्वालियर के सिंधिया घराने से पगड़ी मंदिर लाई जाती है। भगवान काल भैरव डोल ग्यारस और भैरव अष्टमी पर प्रजा का हाल-चाल जानने के लिए नगर भ्रमण करते हैं। भगवान काल भैरव का दर्शन करने के लिए देशभर से श्रद्धालु आते हैं। भगवान काल भैरव को मदिरापान भी कराया जाता है।
शाम 4:00 बजे कलेक्टर करेंगे पूजन अर्चन
डोल ग्यारस पर आज सोमवार को भैरवगढ़ में काल भैरव मंदिर से निकलने बाबा की भव्य सवारी निकलेगी। सवारी से पूर्व बाबा का आकर्षक श्रृंगार किया जाएगा व परंपरा अनुसार सिंधिया परिवार की ओर से पगड़ी धारण कराई जाएगी। शाम 4:00 बजे कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम द्वारा पूजन के बाद सवारी शुरू होगी। सवारी भैरवगढ़ का भ्रमण करते हुए सिद्धवट पहुंचेगी, जहां पूजन-आरती की जाएगी। कालभैरव मंदिर के पुजारी सदाशिव चतुर्वेदी ने बताया कि मंदिर में फूलों की सजावट की गई है तो रंगीन विद्युत रोशनी से पूरा मंदिर परिसर जगमगा उठा है। सवारी में भगवान कालभैरव की पालकी, बैंड, ढोल, ध्वज, घोड़े, बग्घी के साथ झांकियां शामिल रहेंगे। भैरवगढ़ का भ्रमण करते हुए सवारी रात्रि में पुन: कालभैरव मंदिर पहुंचकर समाप्त होगी। इसके बाद आरती-पूजा कर उत्सव का समापन किया जाएगा।
सिंधिया ने भगवान कालभैरव के चरणों में रख दी थी अपनी पगड़ी
पंडित सदाशिव चतुर्वेदी के मुताबिक 400 साल पहले महादजी सिंधिया की सेना पर हुए हमले में विजय हासिल करने की पूरी कोशिश की गई थी। उस समय महादजी सिंधिया ने काल भैरव के चरणों में अपनी पगड़ी रखकर प्रार्थना की। भगवान काल भैरव के आशीर्वाद से हारी हुई जंग में सिंधिया घराने को विजय प्राप्त हुई। तब से लेकर अब तक कोई भी दुश्मन सिंधिया घराने से जंग नहीं जीत पाया है।