मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा नागदा में जनसभा के दौरान नागदा को नया जिला बनाने की घोषणा की गई थी। उस दौरान यह भी कहा था कि जो तहसील चाहेगी, उसे ही नए जिले में सम्मिलित किया जाएगा। इसके बाद से ही खाचरौद तहसील में विरोध के स्वर बुलंद होने लगे तथा नव प्रस्तावित नागदा जिले में सम्मिलित नहीं होने के लिए जनमत एकत्र होने लगा।
पहले तो सोशल मिडिया पर और फिर ज्ञापन के समय प्रस्तावित नागदा जिले में खाचरौद को शामिल करने को लेकर एतराज धरातल पर भी नजर आया। ज्ञापन देने के पूर्व समाजसेवी ऋतुराज बुड़ावनवाला, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष विजय सेठी, अनिल शर्मा, अनिल छाजेड़, निशित सिसौदिया अनोखीलाल भंडारी, प्रवीण नायक, भाजपा नेता लोकेन्द्र मेहता, अखिलेश शर्मा, सार्थक ग्रुप के अध्यक्ष मनीष शर्मा द्वारा जनसमुदाय को संबोधित किया गया।
ज्ञापन का वाचन खाचरौद अधिकार मंच के अखिलेश राठौर ने किया। इस दौरान खाचरौद अधिकार मंच के योगेश बैरागी, मोनु बुड़ावनवाला, अंकित सोलंकी, गोलु जायसवाल, गौरव शर्मा, शिवम व्यास, सुनिल माहेश्वरी, अंकित राठौर सोलंकी, सुनिल मुंगिया, सीताराम वाक्तरिया, राहुल गुल्या और खाचरौद के अनेक धार्मिक एवं सामाजिक संगठन के साथ ही जागरूक युवा एवं जनता शामिल रहे।
ज्ञापन में बताया इसीलिए खाचरौद को बनाना चाहिए जिला
खाचरौद अधिकार मंच द्वारा ज्ञापन में बताया कि खाचरौद तहसील दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग के मुख्य ट्रैक पर स्थित होकर भौगोलिक दृष्टि से जिला मुख्यालय के लिए पूरी तरह से उपयुक्त है। खाचरौद में विकास खंड होकर 130 ग्राम पंचायत होने के साथ ही सभी प्रमुख शासकीय विभाग भी स्थित हैं।
खाचरौद ग्वालियर स्टेट के समय से पुरानी तहसील होकर जिला बनने के लिए सभी आवश्यकता औपचारिकता और वैधानिकताओं को पूर्ण करता है। खाचरौद तहसील को जिला बनाया जाने के लिए पर्याप्त आधार होने के बावजूद भी खाचरौद की अनदेखी कर निरंतर उपेक्षा की जा रही है तथा खाचरौद तहसील के लोगों से परामर्श किए बिना खाचरौद तहसील को अन्यत्र जिले में जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे जन आक्रोश है।