मंदिर में किसान चढ़ाते हैं नई फसल
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चिंतामन गणेश का दरबार उज्जैन में एक ऐसा स्थान है, जहां पर चैत्र मास में चिंतामन गणेश की जतरा लगती है। इस जतरा में शामिल होने वाले भक्त जहां पूजन-अर्चन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। वहीं संभाग भर के किसान अपनी नई फसल भी चिंतामन गणेश को अर्पित करते हैं।
मंदिर के प्रशासक अभिषेक शर्मा ने बताया कि भगवान श्रीराम ने इस मंदिर की स्थापना की थी। मंदिर में चैत्र मास के प्रति बुधवार को जतरा का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु भगवान के दर्शन करने पहुंचते हैं। मंदिर के पुजारी पंडित शंकर गुरु ने बताया कि चैत्र मास में बुधवार को चिंतामन गणेश मंदिर में दूसरी जतरा लगी। तड़के चार बजे मंदिर के पट खुले। इसके बाद भगवान चिंतामन गणेश का पंचामृत अभिषेक-पूजन किया गया।
भगवान चिंतामन गणेश का पूर्णस्वरूप में श्रृंगार कर छप्पन पकवानों का भोग लगाया गया। आरती के उपरांत आम दर्शन का सिलसिला शुरू हुआ। ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले भक्त भगवान को नई फसल अर्पित की। इस दौरान मान्यता पूरी होने पर भक्तों ने बच्चों का तुला दान भी किया। भक्तों को रात 10 बजे तक भगवान के दर्शन हुए। मंदिर प्रशासन ने दर्शनार्थियों के लिए सुगम दर्शन तथा पेयजल आदि के इंतजाम किए।
गायन व नृत्य की हुई प्रस्तुति
बुधवार को चैत्र महोत्सव अंतर्गत दूसरी सांस्कृति सांझ आयोजित हुई। मंदिर प्रशासक अभिषेक शर्मा ने बताया, ख्यात गायक रामचंद्र गांगोलिया लोक गायन की प्रस्तुति दिए। त्रिनेत्र सांस्कृतिक संस्थान की डायरेक्टर मयूरी शर्मा सक्सेना व साथी कलाकारों की नृत्य प्रस्तुति हुई।