उज्जैन में इन दिनों एक नया विवाद गरमा गया है। रामघाट पर होने वाली मां शिप्रा की आरती को लेकर तीर्थ पुरोहित और नगर निगम प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं। जारी नोटिस को लेकर श्री क्षेत्र पंडा समिति के अध्यक्ष पंडित राजेश त्रिवेदी ने आरोप लगाया है कि पुलिस और निगम प्रशासन मां शिप्रा की आरती बंद करवाना चाहते हैं।
पंडित त्रिवेदी ने कहा कि पहले आरती में उपयोग होने वाले माइक और चिलम जब्त किए गए। अब लकड़ी के तख्त और लोहे की टेबल को नगर निगम ने अवैध अतिक्रमण बताते हुए नोटिस जारी कर दिया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि ये तख्त नहीं हटाए गए तो उन्हें जब्त करने के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
पंडित त्रिवेदी ने कहा कि मां शिप्रा की आरती और पूजन हमारा धार्मिक अधिकार है। यदि इसे रोकने का प्रयास किया गया तो पूरा तीर्थ पुरोहित समाज एकजुट होकर विरोध करेगा। आवश्यकता पड़ने पर सनातन धर्म के नाम पर देशभर के सनातनियों को एकत्रित किया जाएगा। इसके बाद भी बात नहीं बनी तो देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों पर आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल तीर्थ पुरोहितों ने रामघाट पहुंचकर नगर निगम के नोटिस का विरोध किया। इस दौरान 'हर-हर मां शिप्रा' के जयकारों से रामघाट गूंज उठा।
श्रद्धालुओं को होगी परेशानी
तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि वे सनातन धर्म और संस्कृति की परंपरा के अनुरूप मां शिप्रा की आरती करते हैं। तख्त पर खड़े होकर आरती करने से घाट पर मौजूद सैकड़ों श्रद्धालु आसानी से आरती के दर्शन कर पाते हैं। यदि तख्त हटा दिए गए तो श्रद्धालुओं को आरती देखने में परेशानी होगी।
मुगलों के समय भी नहीं रुकी, अब कैसे रुकेगी?
पंडित राजेश त्रिवेदी ने नगर निगम और महाकाल थाना पुलिस पर निचले स्तर पर परेशान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुगल शासनकाल में भी उनके पूर्वजों ने वेद-शास्त्रों का संरक्षण किया और धर्म का प्रचार-प्रसार जारी रखा। आज सनातन विचारों की सरकार होने के बावजूद इस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए।
फिर कॉरिडोर और अन्य तीर्थों की आरती का क्या अर्थ?
तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि यदि मां शिप्रा की आरती पर इस प्रकार के प्रतिबंध लगाए जाते हैं तो फिर महाकाल लोक, काशी विश्वनाथ धाम, वाराणसी, हरिद्वार, ऋषिकेश में होने वाली मां गंगा की आरती, ओंकारेश्वर तथा नर्मदापुरम (होशंगाबाद) में मां नर्मदा की आरती का क्या औचित्य रह जाएगा? उनका सवाल है कि सरकार इस प्रकार के कदमों से आखिर क्या संदेश देना चाहती है।
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नदियों को स्वच्छ रखने का दिलाया जाता था संकल्प
मां शिप्रा की आरती के दौरान यहां के तीर्थ पुरोहित श्रद्धालुओं से दक्षिणा लेने के बजाय उन्हें एक विशेष संकल्प दिलाते थे। इस संकल्प के तहत श्रद्धालु यह वचन देते थे कि वे देश की किसी भी नदी को प्रदूषित नहीं करेंगे। तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि इस अनूठी पहल को श्रद्धालुओं ने हमेशा सराहा और इसे जीवन में निभाने का संकल्प भी लिया।