मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार द्वारा प्रारंभ किया गया। श्रीकृष्ण पाथेय अभियान एक अग्रणी सांस्कृतिक पहल है, जिसका उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े प्रमुख ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थलों को एक एकीकृत तीर्थ यात्रा मार्ग में जोड़ रहा है। यह पवित्र सर्किट वृंदावन, उज्जैन, जानापाव, अमझेरा और द्वारका जैसे स्थलों को जोड़ता है, जो श्रीकृष्ण की लीलाओं से गहराई से जुड़े हैं। उज्जैन जहां श्रीकृष्ण ने गुरु सांदीपनि से शिक्षा ली, जानापाव जहां परशुराम द्वारा उन्हें सुदर्शन चक्र प्रदान किया गया। अमझेरा, जहां रुक्मिणी हरण के दौरान उनका रुक्मी से युद्ध हुआ। विशेष रूप से महत्वपूर्ण स्थान हैं।
3200 से अधिक श्री कृष्ण मंदिरों का होगा रख-रखाव
श्रीकृष्ण पाथेय योजना से तीन राज्यों की सरकारें जुड़ी हैं तो योजना को जमीन पर उतारने में थोड़ा समय जरूर लग रहा है। श्रीकृष्ण पाथेय में 3200 से अधिक कृष्ण मंदिरों का रख-रखाव किया जाएगा। मध्यप्रदेश के संस्कृति विभाग ने भगवान कृष्ण से जुड़ी विभिन्न यात्राओं का एक संभावित मार्ग मानचित्र तैयार किया है और अभी और अधिक यात्राओं की पहचान करने का काम जारी है।उज्जैन को इन यात्राओं का केंद्र बिंदु बनाया गया है।
पुरातत्वविदों, धमार्चार्यों एवं लेखकों को जोड़ रही समिति
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर श्रीकृष्ण पाथेय के विकास के लिए सभी समितियों को सक्रिय किया गया है। उन्होंने कहा कि पुरातत्वविदों, धमार्चार्यों एवं भगवान श्रीकृष्ण पर साहित्य के अच्छे लेखकों को भी समिति में जोड़ा जा रहा है। सरकार श्रीकृष्ण पाथेय के लिए केंद्रित होकर काम कर रही है। भविष्य में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी अन्य लीलाओं को भी इस कार्य से जोड़ा जाएगा। श्रीकृष्ण पाथेय के विकास के माध्यम से धार्मिक त्योहारों में सरकार की सहभागिता बढ़ी है।
राज्यों में बनेगा सकारात्मक माहौल
श्रीकृष्ण पाथेय के विकास के लिए भोपाल के अलावा उज्जैन, राजस्थान के जयपुर, भरतपुर, अथवा ब्रज या चौरासी कोस या अन्य किसी विशिष्ट स्थल पर समिति बैठकें आायोजित होगी। ऐसी पहल से सभी राज्यों में श्रीकृष्ण पाथेय के लिए सकारात्मक माहौल बनेगा।
भगवान कृष्ण ने मालवा क्षेत्र की तीन यात्राएं कीं
भगवान श्री कृष्ण ने उज्जैन मे शिक्षा प्राप्त की थी। भगवान कृष्ण 12 वर्ष की आयु में शिक्षा प्राप्त करने के लिए उज्जैन आए थे। श्री कृष्ण पाथेय योजना के तहत तैयार किए गए दस्तावेज में बताया गया है कि भगवान कृष्ण ने मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र की तीन यात्राएं कीं। उनकी पहली यात्रा शिक्षा प्राप्त करने, दूसरी मित्रविंदा से विवाह करने और तीसरी रुक्मणी से विवाह करने के लिए थी।