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15 साल बाद रोहिणी नक्षत्र में जन्माष्टमी: सांदीपनि आश्रम में तैयारी; मोर पंखी पोशाक में सजेगा श्रीकृष्ण दरबार

Thu, 03 Sep 2026 07:46 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

सार

उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में 15 साल बाद रोहिणी नक्षत्र के शुभ संयोग में जन्माष्टमी मनाई जाएगी। भगवान श्रीकृष्ण को केसर स्नान के बाद विशेष नीलांबर पोशाक पहनाई जाएगी। CM मोहन यादव रात 12 बजे महाआरती में शामिल होंगे।

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सांदीपनि आश्रम में जन्माष्टमी की धूम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भगवान श्रीकृष्ण की पावन शिक्षा स्थली और पौराणिक सांदीपनि आश्रम में इस बार श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद इस बार जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र का शुभ और दुर्लभ संयोग बन रहा है। इसके चलते शैव और वैष्णव दोनों संप्रदाय एक ही दिन जन्माष्टमी का पर्व मनाएंगे। जन्मोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। भगवान श्रीकृष्ण की पाठशाला को फूल बंगले की तर्ज पर भव्य रूप से सजाया गया है।

जन्मोत्सव के अवसर पर शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण को केसर स्नान कराया जाएगा। इसके बाद सांदीपनि वंश परिवार द्वारा तैयार विशेष नीलांबर यानी मोर पंखी रंग की मखमली पोशाक और भव्य आभूषण धारण कराए जाएंगे। वहीं, बाल स्वरूप लड्डू गोपाल के लिए सफेद और गुलाबी रंग के विशेष परिधान तैयार किए गए हैं।

पुजारी परिवार की पंडित कीर्ति रूपम व्यास ने बताया कि जन्माष्टमी के वस्त्रों और श्रृंगार की तैयारियां करीब चार महीने पहले ही शुरू कर दी जाती हैं। इस बार परिधानों पर जरदोजी, रेशम और मोतियों की बारीक कारीगरी की गई है। इसके लिए विशेष सामग्री सूरत, जयपुर और कोलकाता से मंगाई गई है।

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महाआरती में शामिल होंगे CM मोहन यादव
आश्रम के पुजारी पंडित रूपम कीर्ति व्यास और पंडित राहुल व्यास ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए परिसर में वाटरप्रूफ व्यवस्था की गई है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस बार भी प्रतिवर्ष की तरह सपरिवार रात 12 बजे होने वाली महाआरती में शामिल होंगे और भगवान श्रीकृष्ण का पूजन-अर्चन करेंगे। जन्माष्टमी के अगले दिन आश्रम में भव्य नंदोत्सव का आयोजन किया जाएगा।

सांदीपनि आश्रम का धार्मिक और पौराणिक महत्व

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मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बड़े भाई बलराम और मित्र सुदामा के साथ महर्षि सांदीपनि के सानिध्य में इसी पवित्र भूमि पर शिक्षा प्राप्त की थी। कहा जाता है कि उन्होंने 64 दिनों में चार वेद, छह शास्त्र, 14 विद्याएं, 18 पुराण और 64 कलाओं का अध्ययन किया था।

आश्रम परिसर का एक स्थान 'अंकपात' के नाम से प्रसिद्ध है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण यहां अपनी पाटी (अंक) धोया करते थे। इसी कारण इस स्थान का नाम अंकपात पड़ा।

आश्रम परिसर में स्थित सर्वेश्वर महादेव का भी विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस शिवलिंग की स्थापना स्वयं महर्षि सांदीपनि ने की थी। इसके पास स्थित गोमती कुंड के बारे में मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण अपने गुरुदेव के लिए इसका जल प्रकट करके लाए थे।

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