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बच्चों में बढ़ी बीमारी: डॉक्टर बोले- खुद से न दें एंटीबायोटिक और इंजेक्शन, वायरल के बाद निमोनिया का खतरा

Thu, 03 Sep 2026 07:19 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल

सार

भोपाल में मौसम बदलने के साथ बच्चों में सर्दी-जुकाम और बुखार के मामले बढ़े हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बुखार कितने डिग्री है, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह देखना है कि बच्चा कैसा व्यवहार कर रहा है। बुखार के साथ सुस्ती, सांस लेने में परेशानी या लगातार खांसी हो तो इलाज में देरी न करें। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक, खांसी की दवा या इंजेक्शन देने से बचें।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश भार्गव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मौसम में बदलाव के साथ राजधानी भोपाल में सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अस्पतालों की ओपीडी में भीड़ बढ़ी है। खासकर बच्चों की ज्यादा परेशानी देखी जा रही है। जयप्रकाश जिला अस्पताल की बाल ओपीडी में रोजाना करीब 175 से 200 बच्चे पहुंच रहे हैं। इनमें लंबे समय से बुखार, सर्दी-खांसी और सांस लेने में परेशानी वाले बच्चे भी शामिल हैं। डॉक्टरों के मुताबिक रोजाना 15 से 20 बच्चों में निमोनिया के लक्षण मिल रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश भार्गव ने कहा कि बच्चों में बीमारी की गंभीरता केवल बुखार की तीव्रता से नहीं, बल्कि बच्चे की हालत से समझी जा सकती है। उनका कहना है कि तेज बुखार उतरने के बाद बच्चा सामान्य रूप से खेल रहा है तो ज्यादा चिंता की बात नहीं है। इसके उलट हल्का बुखार होने पर भी बच्चा सुस्त, चिड़चिड़ा या असामान्य रूप से कमजोर दिखे तो डॉक्टर को दिखाने में तीन-चार दिन का इंतजार नहीं करना चाहिए।
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3 दिन का बुखार, लेकिन बच्चा खेल रहा तो घबराएं नहीं
डॉ. भार्गव के मुताबिक वायरल बीमारी में 72 घंटे तक बुखार रह सकता है। इसलिए केवल तीन दिन बुखार रहने से घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन बीमारी के दौरान बच्चे के व्यवहार पर नजर रखना जरूरी है।अगर बच्चा बुखार उतरने के बाद खेल रहा है, खाना-पीना ले रहा है और सामान्य व्यवहार कर रहा है तो स्थिति अपेक्षाकृत कम गंभीर हो सकती है। वहीं हल्का बुखार होने के बावजूद बच्चा लगातार सुस्त पड़ा है, चिड़चिड़ा है या सामान्य गतिविधियां नहीं कर रहा है तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

वायरल के बाद निमोनिया का खतरा
डॉक्टरों के अनुसार कुछ बच्चों में वायरल संक्रमण के बाद बैक्टीरियल संक्रमण भी हो सकता है। इससे निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है। तेज बुखार, लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी, सांस तेज चलना, कमजोरी और खाना-पीना कम होना ऐसे संकेत हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।राजधानी के श्वसन रोग संस्थान की ओपीडी में भी रोजाना करीब 4-5 निमोनिया के मरीज पहुंचने की जानकारी है।
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4 साल से छोटे बच्चों को खांसी की दवा खुद से नहीं
डॉ. भार्गव ने अभिभावकों को छोटे बच्चों में बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं देने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि चार साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी की मिश्रित दवाएं बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं देनी चाहिए। उन्होंने खास तौर पर एंटीबायोटिक खुद से शुरू नहीं करने की बात कही। उनके मुताबिक कई अभिभावक मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक लेकर बच्चों को दे देते हैं और कई बार इसकी मात्रा भी सही नहीं होती। इससे आगे चलकर दवा के असर में परेशानी हो सकती है।

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बुखार की दवा भी मात्रा देखकर दें
डॉ. भार्गव ने बुखार में पैरासिटामोल देने की बात कही, लेकिन बच्चों में दवा की मात्रा उम्र और वजन के हिसाब से तय होती है। इसलिए माता-पिता को अपनी तरफ से मात्रा बढ़ाकर या बार-बार दवा देने के बजाय डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी से सही मात्रा की पुष्टि करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि तेज बुखार बना रहने पर बच्चे में पानी की कमी और अन्य परेशानी हो सकती है। बुखार बहुत तेज हो, दवा के बाद भी कम न हो या बच्चे की हालत बिगड़ती दिखे तो चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

छोटे बच्चे को बच्चों के डॉक्टर को ही दिखाएं
डॉ. भार्गव ने कहा कि बच्चों की दवा में मात्रा बेहद महत्वपूर्ण होती है। बड़ों की तरह बच्चों में केवल सुबह-शाम या दिन में तीन बार दवा देने का सामान्य नियम लागू नहीं होता। कई दवाओं की मात्रा मिलीलीटर में तय होती है। इसलिए छोटे बच्चों को संभव हो तो बाल रोग विशेषज्ञ से ही दिखाना चाहिए, ताकि उम्र और वजन के अनुसार सही उपचार मिल सके।
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इन संकेतों पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
- बच्चा लगातार सुस्त या असामान्य रूप से चिड़चिड़ा रहे
- तेज बुखार बना रहे या बार-बार लौटे
- सांस लेने में परेशानी हो
- सांस सामान्य से तेज चले
लगातार खांसी हो
- बच्चा खाना-पीना कम कर दे
- बुखार के साथ उल्टी-दस्त हों
- बच्चा सामान्य गतिविधियां न कर पाए
- तेज बुखार के दौरान झटके आएं

हाथों की सफाई सबसे जरूरी
डॉ. भार्गव ने छोटे बच्चों में हाथों की सफाई पर विशेष जोर दिया। उनका कहना है कि छोटे बच्चे अक्सर हाथ मुंह में डालते हैं, इसलिए उनके हाथ दिन में कई बार साफ करने चाहिए। घर में किसी सदस्य को सर्दी-जुकाम या वायरल संक्रमण हो तो बच्चे से नजदीकी संपर्क कम रखना भी जरूरी है। सर्दी-जुकाम में भाप जैसी सामान्य राहत की चीजें अपनाई जा सकती हैं, लेकिन दवाओं के मामले में डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से भी शुरुआती सलाह ली जा सकती है। जरूरत पड़ने पर बच्चे को सरकारी अस्पताल ले जाना चाहिए।
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