17 राउंड के मतगणना के प्रथम दौर से भाजपा प्रत्याशी जितेन्द्र सिंह पंड्या ने बढ़त बना ली थी, जोकि परिणाम घोषित होने तक लगातार बढ़त जारी रही थी। हालत यह रही कि बड़नगर के 232 मतदान केन्द्रों में से भाजपा को 175 मतदान केन्द्रों पर विजय हुई, जबकि कांग्रेस मात्र 34 मतदान केन्द्रों पर ही बढ़त मिली। इसी प्रकार बड़नगर विधानसभा से कांग्रेस से बगावती तेवर के रुप में उतरे राजेन्द्र सिंह सोलंकी को 31005 मत प्राप्त होकर क्षेत्र के 16 मतदान केन्द्रों से बढ़त बना सके। जबकि भाजपा के बागी उम्मीदवार प्रकाश गौड़ ने 10480 मत प्राप्त कर मात्र 07 मतदान केन्द्रों पर ही बढ़त बनाकर अपनी जमानत गंवानी पड़ी।
महाकाल का लिया आशीर्वाद
जैसे-जैसे परिणामों की घोषणा होती रही, भाजपा खेमे में उत्साह का वातावरण बनता गया। दोपहर तक ढोल नगाड़ों के साथ भाजपा समर्थक सड़कों पर उतर आये व जीत की खुशी में ढोल व गुलाल उड़ाने का सिलसिला जारी करने लगे। इधर, भाजपा के विजय प्रत्याशी जितेन्द्र सिंह पंड्या ने उज्जैन में भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया।
20 साल बाद फिर सेवा सदन पहुंची भाजपा
पूर्व विधायक उदयसिंह पंड्या का निवासी सेवासदन, जहां पर 20 वर्ष पूर्व उदयसिंह पंड्या ने चुनाव जीत था। जहां से वर्षों तक भाजपा की राजनीतिक गतिविधियां संचालित होती थी। अब 20 साल बाद उनके पुत्र जितेन्द्र सिंह पंड्या ने भाजपा से चुनाव जीत कर एक बार फिर भाजपा को उनके सेवा सदन लाकर इसे भाजपा का केंद्र बनाने में सफल हो गये हैं।
एक अकेला सब पर भारी
भारतीय जनता पार्टी ने जितेन्द्र उदयसिंह पंड्या के रुप में अपना प्रत्याशी घोषित करने के बाद से ही क्षेत्र की राजनीति में भुचाल आ गया था। वहीं बगावत के स्वर भी उठ रहे थे । चुनाव के दौरान वरिष्ठ भाजपा नेताओं की दूरियों से झूझते हुए भी लाड़ली बहना व जनता के समर्थन के साथ चुनावी रण में डटे रहे। हालत तो यह थी कि मुख्यमंत्री की सभा के दौरान भी भाजपा के बड़े नेता मंच से नदारद रहे। ऐसी विकट परिस्थितियों में भी भाजपा प्रत्याशी जितेन्द्रसिंह पंड्या ने बड़नगर विधानसभा के अब तक की सबसे बड़ी जीत दर्ज इतिहास रच दिया है।
जातिवाद पर राष्ट्रवाद भारी
विधानसभा चुनाव की शुरुआत से ही जातिगण समीकरण चुनाव परिणामों को प्रभावित करते दिख रहे थे। बड़नगर क्षेत्र जहां सर्वाधिक राजपूत मतदाता है, जोकि भाजपा से टिकट की दावेदारी कर रहे थे। वहीं कांग्रेस के बागी प्रत्याशी राजेन्द्रसिंह सोलंकी का अंतिम समय में कांग्रेस ने टिकट काट दिया था, जिसके चलते वे निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे। इसी प्रकार एक अन्य प्रत्याशी प्रकाश गौड़ जोकि जातिगत कार्ड पर चुनावी मैदान में थे, किन्तु जनता ने जातिवाद को नकारते हुए राष्ट्रवाद पर अपनी मोहर लगाई।