भारतीय जनता पार्टी ने 66 साल के कुल 13 विधानसभा चुनाव में उज्जैन जिले से एक भी महिला को उम्मीदवार नहीं बनाया है। जबकि कांग्रेस ने तीन बार विधानसभा सीट महिदपुर, उज्जैन उत्तर और उज्जैन दक्षिण से अभी तक आठ बार महिला प्रत्याशी को मौका दिया है। इसमें चार बार महिला प्रत्याशी जीतीं तो चार बार हारी भी हैं।
बता दें कि हारने के बाद भी कांग्रेस ने महिला प्रत्याशियों को दोबारा भी मौका दिया है। इस बार फिर 2023 में कांग्रेस ने माया त्रिवेदी को अपना प्रत्याशी बनाया है। साल 1957 में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में जिले की पहली महिला राजदानकुंवर किशोरी उज्जैन उत्तर विधानसभा से चुनाव लड़ी थीं और वह 11,669 वोट से जीती थीं। नागदा-खाचरौद विधानसभा से एक भी महिला प्रत्याशी को भाजपा-कांग्रेस दोनों पार्टी ने उम्मीदवार नहीं बनाया है। अभी तक के 13 विधानसभा चुनाव में 1980 में मात्र एक महिला प्रत्याशी स्नेहलता राठी ही निर्दलीय रूप से चुनाव लड़ी हैं, जिन्हें 159 वोट मिले थे। उसके बाद एक भी महिला प्रत्याशी ने निर्दलीय चुनाव नहीं लड़ा है।
उज्जैन में विधानसभा सीटों पर महिला प्रत्याशियों को मौका बहुत कम दिया जाता है। लेकिन छोटे चुनाव नगर पालिका, नगर परिषद, जनपद पंचायत के चुनाव में जरूर महिलाओं को पार्टियों द्वारा मौका दिया जाता है। बताया जाता है छोटे चुनाव में महिलाओं के लिए सीट रिजर्व होती है, इसलिए उन्हें चुनाव में उतारा जाता है।
कांग्रेस ने इन महिलाओं को दिए हैं टिकट
- साल 1957 में राजदानकुंवर किशोरी जीती उत्तर से
- साल 1967 हंसा बेन हारी उज्जैन उत्तर
- साल 1993 कल्पना परुलेकर हारी महिदपुर
- साल 1998 कल्पना परुलेकर जीती महिदपुर
- साल 1998 प्रीति भार्गव जीती उज्जैन दक्षिण
- साल 2003 प्रीति भार्गव हारी उज्जैन दक्षिण
- साल 2008 कल्पना परुलेकर जीती महिदपुर
- साल 2013 कल्पना परुलेकर हारी महिदपुर
उज्जैन से नीलेश नागर की रिपोर्ट