उज्जैन जिले में पीएम मोदी की तस्वीर पर स्याही पोती जा रही है। दरअसल इन दिनों यूरिया की बोरियां किसानों को बांटी जा रही हैं। बोरियों पर किसानों को संदेश के साथ पीएम मोदी का फोटो भी लगा है। आचार संहिता के चलते पीएम मोदी की तस्वीर पर स्याही पोतकर छिपाया जा रहा है।
बता दें कि मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव में एक महीने का भी समय नहीं बचा है। चुनाव निर्विघ्न रूप से संपन्न हों, इसके लिए आदर्श आचार सहिंता लागू है। इसका सख्ती से पालन भी करवाया जा रहा है। आचार संहिता का पहला निशाना संपत्ति विरूपण होता है जिसमे सार्वजनिक स्थानों पर राजनीति से संबंधित व किसी दल के नेता आदि जो चुनाव को प्रभावित करते हैं। उनके फोटो का भी प्रदर्शन किसी द्वारा नहीं किया जा सकता है। यदि ऐसा कोई करता है तो उस पर नियमानुसार आचार संहिता के उल्लंघन की कार्रवाई की जाती है। ऐसे में चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन की कार्रवाई का डर खाद विक्रेता व्यापारियों की परेशानियों का सबब बनकर सामने आ रहा है। इसमें व्यापारियों को यूरिया खाद बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि यूरिया खाद की बोरियों पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फोटो छपी हूई है और आचार संहिता के डर से इस फोटो को हटाने के लिए स्याही पोती जाकर खाद विक्रय किया जा रहा है।
क्या कहता है नियम
चुनाव आयोग द्वारा रसायन और उर्वरक मंत्रालय, उर्वरक विभाग को पत्र लिखकर कहा गया कि सरकार द्वारा लगाए गए होर्डिंग्स, विज्ञापनों आदि किसी जीवित राजनीतिक पदाधिकारी या राजनीतिक दल की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने की कोशिश करते हैं या उनका दावा करते हैं और जिन पर उनकी तस्वीरें या नाम या पार्टी का प्रतीक है, उन्हें तुरंत हटा दिया जाना चाहिए। क्योंकि कोई भी राजनीतिक पदाधिकारी या राजनीतिक दल सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग और स्वयं की प्रशंसा करने या अपनी या किसी राजनीतिक नेता की व्यक्तिगत छवि को बढ़ाने के लिए सार्वजनिक खजाने से व्यय नहीं कर सकता है। इस तरह के होर्डिंग्स आदि सार्वजनिक लागत पर उनके व्यक्तिगत / पार्टी चुनाव अभियान के लिए हैं। इसलिए जिन क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू है। वहां किसी भी राजनीतिक व्यक्ति की तस्वीर के बिना उर्वरक बैग या किसी अन्य माल के स्टॉक का उपयोग किया जाए।
उज्जैन से निलेश नागर की रिपोर्ट