महाकाल की भस्मारती की फर्जी अनुमति देने के मामले में एफआईआर कराई जा चुकी है। मामले में सात व्यक्ति दोषी पाए गए हैं। इसमें केएसएस कंपनी के माध्यम से कार्यरत कर्मचारी एवं कुछ पंडित-पुजारी शामिल हैं। कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि दोषी पाए गए आउटसोर्स कंपनी केएसएस कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से कार्य से हटाया जाए और कंपनी के विरुद्ध पांच लाख रुपये अर्थदंड लगाया जाए।
बता दें कि श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाएं जैसे- भस्मारती पंजीयन, शीघ्र दर्शन टिकट, जल अर्पण रसीद, अभिषेक पूजन इत्यादि की ऑनलाइन व्यवस्था की जा रही है। इसी तारतम्य में गत 16 अप्रैल को श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों ने भस्मारती में प्रवेश के लिए जारी अनुमति पत्र में हेराफेरी कर दिल्ली के तीन लोगों से 4500 रुपये लेकर धोखाधड़ी की थी। जांच के दौरान दूसरों के नाम से जारी अनुमति पत्र में कांटछांट कर भस्मारती की नकली अनुमति रसीद उन्हें थमा दी गई थी। इसके बाद महाकाल थाने में आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई थी।
कलेक्टर ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
जांच के बाद दोषी पाए गए लोगों पर सख्त कार्रवाई के लिए कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने आदेश दिए हैं। उन्होंने मंदिर के प्रशासक संदीप सोनी को से कहा कि आउटसोर्स कंपनी केएसएस के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से कार्य से पृथक किया जाए और कंपनी के विरुद्ध अर्थदंड लगाया जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि मंदिर परिसर के आंतरिक एवं बाह्य क्षेत्र में पुजारी, पुरोहित, प्रतिनिधियों के अतिरिक्त अनधिकृत रूप से प्रवेश तत्काल प्रतिबंधित किया जाए।