उज्जैन में इस साल मानसून के दौरान 682 मिमी बारिश दर्ज की गई, जिससे बांधों और भूजल स्तर पर असर पड़ा है। जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रसाद गुप्त के अनुसार, अगले 3-4 दिनों में ठंड बढ़ने की संभावना है।
उज्जैन शहर में इन दिनों दिन के समय गर्मी का असर बना हुआ है। कम बारिश के कारण जल संकट की चिंता भी बढ़ रही है। इस बीच जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रसाद गुप्त ने मौसम को लेकर जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि कम बारिश का ठंड पर कोई सीधा असर नहीं पड़ता। अगले 3 से 4 दिनों में न्यूनतम तापमान में और गिरावट आने की संभावना है।
डॉ. गुप्त के अनुसार, उज्जैन में ठंड पहाड़ों से आने वाली ठंडी हवाओं के कारण बढ़ती है। फिलहाल दिन का तापमान अधिक बना हुआ है, क्योंकि ठंडी हवाओं का प्रभाव अभी क्षेत्र में शुरू नहीं हुआ है। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी शुरू हो चुकी है। वहां से आने वाली ठंडी हवाओं का असर जल्द ही उज्जैन में भी दिखाई देगा। हवाओं के आने के साथ तापमान में गिरावट आएगी।
उन्होंने बताया कि सुबह का न्यूनतम तापमान अब 9.5 डिग्री तक पहुंचने लगा है। सूर्य के दक्षिण की ओर बढ़ने से उसकी किरणें सीधे पहले की तरह नहीं पड़ेंगी। साथ ही दिन की अवधि कम होने से ठंड का असर बढ़ेगा। नवंबर के अंत और दिसंबर में आमतौर पर सबसे ज्यादा ठंड पड़ती है।
डॉ. गुप्त ने बताया कि इस बार मानसून के कई सिस्टम बने, लेकिन वे पश्चिमी मध्य प्रदेश में पर्याप्त बारिश नहीं कर सके। ये सिस्टम गुजरात और राजस्थान की ओर चले गए। इसके कारण बांधों में पर्याप्त पानी नहीं भर पाया और भूजल स्तर में भी सुधार नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि भूजल स्रोतों में पानी काफी कम हो चुका है।
जीवाजी वेधशाला के अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रसाद गुप्त ने लोगों से जल संरक्षण को प्राथमिकता देने की अपील की